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कॉम्पलैक्सों में अवैध निर्माण नियमन पर हंगामा, विरोध पर प्रस्ताव खारिज

6 वर्ष पहले
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भीलवाड़ा। नौकॉमर्शियल काम्प्लैक्स में अवैध निर्माण का नियमन तथा यूआईटी क्षेत्र में स्टेट ग्रांट एक्ट के पट्टे जारी करने के प्रस्ताव पर नगर परिषद बोर्ड बैठक में सोमवार को जमकर हंगामा हुआ। पार्षदों के विरोध के बाद आखिरकार दोनों प्रस्ताव खारिज कर दिए गए।

चेयरमैन अनिल बल्दवा की अध्यक्षता में सुबह 11 बजे परिषद सभागार में बैठक शुरू हुई। बल्दवा ने जैसे ही कॉम्पलैक्सों में अवैध निर्माण नियमन का प्रस्ताव (नंबर 18) पढ़ना शुरू किया। डायस पर बैठे उप सभापति दिनेश शर्मा खड़े होकर बोले-यह प्रस्ताव पास नहीं होने देंगे। प्रस्ताव में 21 प्रकरणों में से अधिकतर कॉमर्शियल कॉम्पलैक्स से संबंधित हैं।
कॉम्पलैक्स मालिकों ने लैंड यूज चेंज करवाया, पैसा जमा हुआ। नक्शा पास हुआ। शर्मा ने आरोप लगाया कि कुछ लोग अपने स्वार्थ के लिए कॉम्पलैक्सों के अवैध निर्माण को नियमित करने का प्रस्ताव ले आए हैं।
नेता प्रतिपक्ष अब्दुल सलाम, उप नेता शिवराम खटीक, पार्षद मनोज पालीवाल, केदार जागेटिया, यशवंत कोडवानी सहित पक्ष-विपक्ष के कई पार्षदों ने भी विरोध किया। इस मुद्दे पर सदन में लगभग 10 मिनट तक हंगामा होता रहा।

लोग कहेंगे-पार्षदों ने सेटिंग कर ली

कुछ पार्षदों का कहना था कि आवासीय का नियमन कर दिया जाए, कॉमर्शियल नहीं करें। सलाम ने कहा कि एक बार आवासीय में नियमन हो गया तो भूखंड मालिक बाद में कॉमर्शियल में बदलवा लेगा।
कोडवानी का कहना था-नियमन किया तो हम पर आरोप लगेगा कि पार्षदों ने सेटिंग कर ली। बल्दवा ने बार-बार कमेटी बना जांच कराने का सुझाव दिया, पर पार्षद नहीं माने। वे नियमन प्रस्ताव पूरी तरह खारिज करने की मांग पर अड़े रहे। अंतत: बल्दवा को प्रस्ताव खारिज करने का फैसला सुनाना पड़ा। तब सदस्य शांत हुए।
सभापति के अतिक्रमण को ‘मौन सहमति’

भीलवाड़ा. सभापति अनिल बल्दवा के काशीपुरी आवास के पीछे नियम विरुद्ध किए स्ट्रिप ऑफ लैंड के अतिक्रमण को प्रतिपक्ष द्वारा मुद्दा बनाने की रणनीति बोर्ड मीटिंग में खामोश हो गई। 29 बिंदुओं में से कमोबेश सब पर पार्षदों ने बात रखी, लेकिन इस पर चुप रहे।
नेता प्रतिपक्ष अब्दुल सलाम जो इसे नियम विरुद्ध बता रहे थे उन्होंने भी शांतिपूर्वक इस बिंदु को हल होने दिया। उप सभापति दिनेश शर्मा ने यह प्रस्ताव पढ़कर पारित करवा दिया। सभी ने इस प्रस्ताव को मौन सहमति दी और प्रस्ताव आगे बढ़ गए।
इधर, स्टेट ग्रांट का पट्टा लेने के लिए यूआईटी नगरपरिषद के बीच फंसी जनता की फाइलों पर सहमति नहीं बन पाई। ये फाइल्स वापस यूआईटी को ट्रांसफर करने का तय हुआ। मीटिंग की शुरुआत में 133.2 करोड़ रुपए का बजट पारित हुआ।

आगे क्या: प्रकरणों की दुबारा जांच करवाएंगे

नगरपरिषद सभापति अनिल बल्दवा का कहना है कि सेटबैक कवर्ड कर लेने एवं बगैर स्वीकृति निर्माण के 21 मामलों में नियमन की सदन ने पुष्टि नहीं की। इनकी दुबारा जांच करवाएंगे। जो सही होंगे, उन्हें अगली बोर्ड बैठक में रखेंगे। जिनमें कोई दिक्कत होगी तो अतिक्रमण शाखा में भेजकर विधिसम्मत कार्रवाई करेंगे।

स्टेटग्रांट पट्टे की फाइलें यूआईटी को लौटाएंगे

यूआईटी क्षेत्र में स्टेट ग्रांट एक्ट के तहत पट्टे जारी करने के लिए आईं फाइलों पर भी पार्षदों ने एतराज जताया। पार्षद मनोज पालीवाल का कहना था कि ये फाइलें उस वक्त की कृषि भूमि की है, जब यूआईटी बनी ही नहीं थी।
अभी जो फाइलें आई हैं, उनमें अधिकतर भू-माफियाओं की है। उनके पट्टे बनाने का निर्णय बोर्ड क्यों लें। इस पर सभी पार्षदों ने सहमति जताई। तब यह प्रस्ताव पास नहीं कर सभी फाइलें फिर से यूआईटी को लौटाने का निर्णय हुआ।

अनशन पर बैठेंगे पुर पार्षद विश्नोई

पुरके पार्षद घीसू विश्नोई का दर्द मीटिंग में सामने आया जब उन्होंने कहा कि यहां की सफाई व्यवस्था नहीं सुधर पाई। कोई अफसर मेरी नहीं सुनता। मैं अब अनशन करूंगा।

मैं किस बात का पार्षद हूं, लोगों से नजर तक नहीं मिला पा रहा हूं। मेरा पुर में निकलना दुश्वार होने लगा है। पेचवर्क हुआ सुलभ शौचालय सफाई हो पाई। हर मीटिंग में अपना रोना रोता हूं। इस पर उन्हें सात दिन में सुनवाई कर कार्रवाई का आश्वासन दिया गया। मीटिंग में जेईएन रेखा मीणा पर कार्रवाई की मांग की गई जिस पर स्वीकृति दी गई।

गांधीसागर पर फिर खर्च करेंगे 5 करोड़

शहर के बीच स्थित गांधीसागर तालाब में गंदा पानी जाने से रोकने के लिए बड़ला चौराहे से हलेड़ चौराहा तक नाला बनाया जाएगा। इस पर 4.95 करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे। इसका प्रस्ताव बोर्ड बैठक में पेश किया गया।
सदस्यों ने ओम नराणीवाल मधु जाजू के सभापति कार्यकाल में भी गांधीसागर पर करोड़ों रुपए खर्च होने के औचित्य पर सवाल उठाए। तब बल्दवा ने कहा कि नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल द्वारा गंदा पानी गांधीसागर में जाने से रोकने के निर्देश हैं। तब सदस्यों ने प्रस्ताव को हरी झंडी दे दी।

इधर, सभापति ने दिया नियम का हवाला

पार्षद निशा जैन ने उनके वार्ड नंबर 24 में स्टेट ग्रांट के पट्टे जारी करने का मामला उठाया। उन्होंने कहा कि कई लोगों पट्टे की फाइलें लगी हैं, लेकिन पट्टे जारी नहीं हुए। इस पर सभापति ने नियमों का हवाला देते हुए कहा कि आप जिन मामलों की बात कह रही हैं वे अतिक्रमण के नहीं हैं।

बीपीएल सूची में नाम जोड़ने का विरोध

पार्षद केदार जागेटिया ने कहा कि दस वर्ष से एक भी बीपीएल कम नहीं हुआ है। लगातार बढ़ रहे हैं। इस मामले की जांच नहीं की जा रही है। एक बार फिर बीपीएल के नामों को हरी झंडी देने की कोशिश है। मीटिंग में 41 परिवारों को बीपीएल सूची में जोड़ने का प्रस्ताव लाया गया।

विरोध के बाद इनकी जांच के लिए कमेटी बनाने का आश्वासन सभापति ने दिया।

आपस में उलझते भाजपा-कांग्रेस पार्षद।