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तीन नकबजनों को सजा पांच मफरूर घोषित

6 वर्ष पहले
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न्यायिकमजिस्ट्रेट प्रथम वर्ग (पश्चिम) ने सोमवार को तीन नेपाली नकबजनों को ढाई-ढाई साल की सजा सुनाई। सजा के साथ ही तीनों को सात-सात हजार रुपए जुर्माने से भी दंडित किया। दो महिलाओं समेत पांच जनों के फरार होने पर उन्हें मफरूर घोषित किया गया।

न्यायिक सूत्रों के अनुसार 18 जुलाई 2013 को हरीश अग्रवाल ने सुभाषनगर थाने में मामला दर्ज कराया जिसमें बताया कि पेट्रोल पंप व्यवसायी आरसी व्यास कॉलोनी निवासी उसका भाई पवन अग्रवाल बीमार प|ी को दिखाने जयपुर गया था। रखवाली के लिए चौकीदार ईश्वर लाल दरोगा को छोड़ गया। देर रात चार जने घर में घुसे तथा चौकीदार ईश्वरलाल को बंधक बना हाथ पैर बांध उस पर कंबल डाल दिया और सभी ने घर को खंगाल डाला। चोर घर से एक लाख 58 हजार 500 रुपए, 133 चांदी के पुराने सिक्के, नौ चांदी के गिलास, सोने की चार चूडिय़ां, अंगूठी, टॉप्स, ब्रासलेट समेत 20 लाख का माल समेट ले गए। अग्रवाल की रिपोर्ट पर सुभाषनगर पुलिस ने मामले की जांच करते हुए नकबजनी के आरोप में आठ जनों को गिरफ्तार कर कोर्ट में चालान पेश किया। सोमवार को न्यायाधीश ने नकबजनी का दोषी मानते हुए नेपाल के तीन जनों सनम बुग, गोकुल बहादुर उर्फ गोरख बहादुर गोविंद बिष्ट को ढाई-ढाई साल कैद की सजा सात-सात हजार रुपए जुर्माने की सजा सुनाई। न्यायाधीश ने नेपाल की ही दो महिलाओं सहित पांच जनों को मफरूर घोषित किया। इनमें नरेश बहादुर, पदम बहादुर, दिनेश सांई, सरिता सांई प|ी दिनेश सांई कालू सांई उर्फ चंदा प|ी जितेंद्र सांई शामिल है।