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शौचालय के लिए कसूर माता-पिता का और जलील हो रहे हैं बच्चे
जिनघरों में शौचालय नहीं है उनमें कसूर भले माता-पिता का है परंतु उनके बच्चों को जलील किया जा रहा है। डीईओ प्रारंभिक (प्रथम) सुभाष शर्मा ने मंगलवार को शहर के सिंधुनगर स्कूल में बच्चों की नोटबुक पर यह स्टिकर चिपका दिए कि उनके घर में शौचालय नहीं है। स्कूल के शिक्षकों की मौजूदगी में डीईओ ने यह स्टिकर बच्चों की नोटबुक पर चिपकाए इसलिए बच्चे कुछ नहीं बोले।
दैनिक भास्कर ने स्टिकर चिपकाने के बाद कुछ बच्चों से बातचीत की तो उन्होंने इसे ठीक नहीं बताया। उधर, डीईओ शर्मा का कहना है कि जिले के सभी दो लाख 80 हजार बच्चों की नोटबुक पर यह लिखा जाएगा कि उनके घर में शौचालय है या नहीं। स्कूल में बच्चे आपस में नोटबुक देखेंगे तो जिन बच्चों के घर में शौचालय नहीं है उन्हें शर्मिंदा होना पड़ेगा। गौरतलब है कि डीईओ ने गत दिनों यह निर्देश जारी किए थे कि सभी संस्था प्रधान अपनी स्कूलों के बच्चों से यह जानकारी ले कि उनके घर में शौचालय है या वे खुले में शौच करते हैं। यदि बच्चे खुले में शौच करते हैं तो संस्था प्रधान ऐसे बच्चों की सूची बनाएगा। इसके बाद उन बच्चों की नोटबुक पर यह लिखा जाएगा कि मेरे घर में शौचालय नहीं है। अब इस आदेश की पालना की शुरुआत हो गई है।
घर में शौचालय नहीं है तो मैं क्या करूं
राउप्रावि सिंधुनगर की सातवीं कक्षा की पूजा जीनगर ने कहा, शौचालय नहीं है तो मैं क्या करुं। मैं पापा को बोल दूंगी जल्दी शौचालय बनवाओ क्योंकि स्कूल में सब बच्चे देखेंगे तो मुझे अच्छा नहीं लगेगा। इसी तरह आठवीं की ललिता गुर्जर, अनु-कंवर की नोटबुक पर भी स्टिकर चिपकाया गया। जिन बच्चों की नोटबुक पर यह स्टिकर चिपकाया वे खुश नहीं थे। उनके मुंह उतरे हुए थे।
^सभी बच्चों की नोटबुक पर शौचालय है या नहीं यह लिखेंगे। इसकी शुरुआत कर दी है। इससे बच्चों उनके अभिभावक को ठीक नहीं लगेगा तो वे शौचालय बनवाएंगे। यदि स्कूल में कोई बच्चा बीमार होगा तो यह मानेंगे कि शौचालय नहीं होने से ही बीमार हुआ है। यह आइडिया कलेक्टर साहब का है। उन्होंने साप्ताहिक समीक्षा मीटिंग में यह करने को कहा था। सुभाषशर्मा, डीईओप्रारंभिक