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पंचायत ने बेची जमीन कलेक्टर ने की निरस्त
{20 पैसे वर्गफीट के भाव में दो जनों को दी
भास्करन्यूज | भीलवाड़ा
आरजियापंचायत ने नियमों से परे जाकर दो व्यक्तियों को 49 हजार 164 वर्गफीट जमीन 20 पैसे प्रति वर्गफीट में बेच दी। 18 साल बाद कलेक्टर कोर्ट ने दोनों पट्टे खारिज कर दिए। पंचायत को जमीन कब्जे में लेने के आदेश भी दिए हैं।
भदालीखेड़ा के उमराव पुत्र अहमद चिता ने कलेक्टर कोर्ट में एक जुलाई 2014 को निगरानी दायर की। इसमें बताया कि तत्कालीन आरजिया सरपंच ने 31 मार्च 1997 को राजू पुत्र नूर चिता को 26045 वर्ग फीट शब्बीर पुत्र कासम खां को 23119 वर्गफीट का प्लॉट 20 पैसे वर्गफीट की दर से बेच दिया। राजू को पट्टा नंबर 2/96 महज 1302 रुपए तथा शब्बीर को पट्टा नंबर 1/96 महज 1156 रुपए में जारी किया। जमीन नगर परिषद के परिधि क्षेत्र में होने के साथ ही नेशनल हाईवे के पास है। इसकी बाजार दर 50 रुपए प्रति वर्गफीट थी। इससे सरकार को लाखों रुपए का नुकसान हुआ। रजिस्ट्री की कार्रवाई 25 जून 2014 को की गई।
कलेक्टर डॉ. रविकुमार सुरपुर ने सभी पक्षों को सुना और माना कि पंचायत ने मनमर्जी से प्लॉट बेचे। पंचायतीराज के प्रावधानों के अनुसार पंचायत को आवासीय के लिए 100 वर्ग गज तथा वाणिज्यिक के लिए 200 वर्गफीट प्लॉट विक्रय का अधिकार है। पंचायत ने इससे ज्यादा किया, जो गलत है। इस आधार पर कलेक्टर ने 5 सितंबर 1996 की आवंटन फाइल, दोनों पट्टे एवं पंचायत आदेश को निरस्त करने का आदेश दिया। कोर्ट ने यह भी कहा कि दोनों प्लॉट पंचायत अपने कब्जे में ले।
बाड़ के आधार पर बेचे
आरजियापंचायत ने दोनों प्लॉट पर कांटों की बाड़ के कब्जे को वैधानिक दर्जा देते हुए प्लॉट बेच दिए, जबकि पंचायतीराज सामान्य नियम 1996 में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है। भूमि विक्रय साधारण नीलामी से होना चाहिए। दोनों प्लॉट के मामले में पंचायत ने ऐसा नहीं किया।
कीमत24 लाख
कोर्टमें दायर निगरानी में उमराव ने बताया कि भीलवाड़ा शहर के परिधि क्षेत्र तथा नेशनल हाईवे के नजदीक होने के कारण दोनों प्लॉट की बाजार दर 50 रुपए प्रति वर्गफीट से कम से नहीं हो सकती। इसी रेट को आधार माना जाए तो 49,164 वर्गफीट की कीमत 24,58,200 रुपए होती है।