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गाड़े मोरों को निकाला, जलाया

7 वर्ष पहले
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मृतमोरों को जलाने के बजाय नियमविरुद्ध दफनाए जाने का मामला दैनिक भास्कर द्वारा उठाए जाने के बाद वन विभाग ने बुधवार को हरणी महादेव नर्सरी में गाड़े गए मृत मोर वापस निकलवाकर जलवाए। मोरों को प्रशासन, पुलिस, मीडिया और आमजन की मौजूदगी में जलाया गया। चार मोरों के शव यहां 29 नवंबर को गाड़े गए थे।

दैनिक भास्कर ने ‘विवाद बना मृत मोर दफनाना’ शीर्षक से खबर प्रकाशित कर वन विभाग द्वारा मोरों को जलाने के बजाय नियमविरुद्ध दफनाने का मामला उठाया था। जिस पर वन मंत्रालय ने भी जांच आदेश किए। चीफ वाइल्ड लाइफ वार्डन एसएन सिंह द्वारा की गई जांच में नियमों की पड़ताल के दौरान यह सामने आया कि मोरों को दफनाना गलत था। इन्हें निकालकर जलाने से यह मैसेज प्रदेशभर में जाएगा, जिससे कहीं भी दफनाने की गलती नहीं की जाएगी। मौके पर उपवन संरक्षक बीपी पारीक, सहायक वन संरक्षक बीसी लोढ़ा, रेंजर रतन सिंह, दाता राम, पटवारी नितिन पुलिस प्रतिनिधि मौजूद रहे।

इसलिए जलाना जरूरी

वन्यजीवोंको जलाने का प्रावधान है। इस संबंध में मुख्यालय द्वारा आदेश जारी किए गए हैं। जंगली जानवरों के अंगों की तस्करी की आशंका के मद्देनजर उन्हें जलाया जाता है। जहां तक मोर का सवाल है तो इसके अंगों का इस्तेमाल दवा मांस का इस्तेमाल आहार के रूप में होता है। सर्दी में मोर के शिकार बढ़ने की आशंका रहती है, क्योंकि इसका मांस अन्य की तुलना में ज्यादा गर्मी करता है। दफनाने पर इन्हें तत्काल वापस निकालकर आहार के रूप में काम लिया जा सकता है।

12वें दिन दोबारा शुरू हुई नए सिरे से प्रक्रिया

हरणीमहादेव नर्सरी में 29 नवंबर को चार मोर दफनाए गए। पटवारी सिपाही तथा आसपास के प्रमुख लोग वहां मौजूद रहे, इसके बाद पंचनामा तैयार किया गया। बुधवार को फिर से नए सिरे से प्रक्रिया शुरू कर शवों को निकालकर प्रशासन की ओर से आए पटवारी, पुलिस, आसपास के प्रमुख लोग मीडिया के सामने शव जलाए गए पंचनामा तैयार कराया गया। विभाग ने यह भी माना कि मृत मोरों को दफनाना गलत था।

हमनेभूल की, उसे सुधारा

उपवनसंरक्षक बीपी पारीक ने बताया कि हमने मोरों को दफनाने की गलती की थी। जिसे सुधारा है। भास्कर द्वारा यह मामला उठाया गया जिससे कि भविष्य में भी कहीं भी इस तरह का मामला अगर होगा तो मृत मोरों को जलाया जा सकेगा। इस खबर के माध्यम से एक मैसेज पूरे प्रदेश में पहुंच गया है।

आरजियान