भीलवाड़ा. राज्य सरकार ने सभी जिलों में कलेक्ट्रेट को मिनी सचिवालय बनाने की कवायद शुरू कर दी है। सामान्य प्रशासन विभाग ने कलेक्टर से इसकी रिपोर्ट मांगी है। इसी के साथ एक साल से बंद पालड़ी में प्रस्तावित मिनी सचिवालय की फाइल से गर्द हटने की उम्मीद जगी है।
संयुक्त शासन सचिव राजीव जैन ने भूमि की उपलब्धता, कलेक्ट्रेट से प्रस्तावित स्थान की दूरी, परेशानियां आदि बिंदुओं पर टिप्पणी मांगी है। उन्होंने कहा, नगर विकास न्यास नगर परिषद सेल्फ फाइनेंसिंग स्कीम में मिनी सचिवालय बनाना चाहे तो उसका प्रस्ताव भी भेजा जाए।
सेल्फ फाइनेंसिंग के तहत यूआईटी या नप वर्तमान भवन को कमाई के लिए उनके उपयोग में ले सकेंगे। इसके बदले में उन्हें मिनी सचिवालय भवन बनाना पड़ेगा। इसके लिए सरकार कोई पैसा नहीं देगी अथवा निर्माण लागत का कुछ हिस्सा देगी। गौरतलब है कि मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने चालू वित्त वर्ष के बजट में सभी जिलों में कलेक्ट्रेट को मिनी सचिवालय के रूप में परिवर्तित करने की घोषणा की थी।
यह है योजना
यूआईटीने पालड़ी, सांगानेर, तेलीखेड़ा, आरजिया गांवों की करीब 7 हजार एकड़ जमीन में मिनी सचिवालय की योजना बनाई। इसमें कलेक्ट्रेट, एसपी सहित लगभग 100 सरकारी कार्यालयों को शिफ्ट करना था। उनके मौजूदा खाली भवन जगह यूआईटी को दी जानी थी, जिसका वह कॉमर्शियल उपयोग करेगा।
गहलोत ने एक साल पहले किया शिलान्यास
तत्कालीन मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने 19 सितंबर 2013 को मिनी सचिवालय का शुभारंभ भदालीखेड़ा में कर चुके। इसका पत्थर आज भी लगा है। यूआईटी ने बेसमेंट सहित दो मंजिला भवन में कलेक्ट्रेट एसपी ऑफिस बनाने के टेंडर भी कर दिए थे। दिसंबर में वसुंधरा सरकार आते ही काम रुक गया। विधायक विट्ठलशंकर अवस्थी ने प्रोजेक्ट एरिया में भू-माफियाओं को लाभ पहुंचाने की शिकायत की। सरकार ने जांच के आदेश दिए थे।