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कश्मीर की बाढ़ से भीलवाड़ा का मछली व्यवसाय मंदा
प्रेम कुमार गढ़वाल | भीलवाड़ा
पिछलेदिनों कश्मीर में बारिश से हुई तबाही का असर भीलवाड़ा के मछली व्यवसाय पर पड़ा है। यहां से दिल्ली मंडी के मार्फत वहां भेजी जाने वाली मछलियों की केवल मांग कम हुई, बल्कि दाम भी घट गए हैं। मछली ठेकेदारों की माने तो प्रति किलो 20 से 25 रुपए भाव कम मिल रहा है। सीजन की शुरूआत में ठेकेदारों को कम रेट पर मछलियां बेचने को मजबूर होना पड़ रहा है। दीपावली बाद मांग के साथ रेट्स भी बढ़ने की संभावना है। उल्लेखनीय है कि एक सितंबर से मत्स्याखेट से रोक हटने के साथ सीजन की शुरूआत हुई है।
प्रतिदिन150 क्विंटल की सप्लाई
ठेकेदारोंके मुताबिक, भीलवाड़ा से प्रतिदिन कोठारी गुवारडी सहित अन्य बांधों से दिल्ली मंडी के लिए 100 से 150 क्विंटल मछलियां भेजी जा रही हैं। दिल्ली मंडी के बड़े व्यापारी वहां छंटनी के बाद मछलियों को श्रीनगर कश्मीर भेजते हैं।
बाढ़के असर से हुआ रेट डाउन
कोठारीडेम के मत्स्य ठेकेदार विक्रम सिंह कालसांस के ठेकेदार शरीफ मोहम्मद का कहना है कि कश्मीर में बाढ़ आने से मछली व्यवसाय प्रभावित हुआ है। वहां मछलियों की मांग तो घटी है, साथ ही भाव भी 20 से 25 रुपए प्रतिकिलो कम हुए हैं। प्रतिदिन सात-आठ गाड़ी मछली दिल्ली मंडी भेजी जा रही हैं।
जलाशयउत्पादन की यह है स्थिति
मत्स्यविभाग के अनुसार, जिले में श्रेणी के 11, बी के 14 सी के 100 डी श्रेणी के 260 जलाशयों के साथ ही कोठारी, कांउली, बनास मेनाली नदियों में भी मछली पालन होता है। इन जलाशयों नदियों से प्रति वर्ष 1500 से 2000 मैट्रिक टन मछली उत्पादन होता है।
मछलीकी यह है प्रमुख मंडियां
दिल्ली,सिली-गुड़ी, फरीदाबाद, मुजफ्फरपुर, लखनऊ, गोरखपुर, कानपुर कोलकाता मंडियों में भीलवाड़ा की मछलियां बेची जाती हैं। इन मंडियों में गोल्डन, राऊ, कतला आदि किस्म की मछलियां बेची जाती हैं।
^वर्तमानमें मछली की मांग कम है। बारिश का सीजन खत्म हुआ है। यह समय मछलियों की बढ़त का है। डॉ.अनिल जोशी, मत्स्यविकास अधिकारी, भीलवाड़ा
^कश्मीरमें बाढ़ के चलते मछलियों की मांग रेट कम हुई है। दीपावली बाद मांग रेट में तेजी आने की संभावना है। अभी कुछ बांधों से ही मछलियां निकालकर बेची जा रही है। राजेंद्रसिंह शेखावत, मत्स्यठेकेदार, पचानपुरा बांध