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सीतारामजी की बावड़ी में कछुए ने दम तोड़ा

7 वर्ष पहले
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भीलवाड़ा | राम स्नेही संप्रदाय के आद्याचार्य स्वामी रामचरण जी महाराज की तपोस्थली सीताराम जी की बावड़ी में रह रहे कछुए की बुधवार को मृत्यु हो गई। बावड़ी आने वाले श्रद्धालु इसके दर्शन करते थे।सीताराम सत्संग भवन ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष 76 वर्षीय अखेराम तोषनीवाल ने बताया कि कछुए की उम्र 150 साल से भी अधिक है।
लगभग 3.50 फीट लंबा 2.50 फीट चौड़े कछुए का वजन 90 से 100 किलो था। यह दो व्यक्तियों से भी नहीं उठाया जा सका। कछुआ अधिकतर पानी में ही रहता था। जब यह पानी पर निढाल दिखा तो कुछ लोगों ने बाहर निकाला। इसके कुछ देर बाद ही उसकी मृत्यु हो गई। बावड़ी का महत्व इसलिए भी है कि 1817 में रामचरण जी महाराज ने 12 साल तक तथा बाद में सीताराम दास जी महाराज ने तपस्या की थी।