निर्भया केंद्र के लिए जमीन की तलाश
दुष्कर्म,ऑनर किलिंग, यौन शोषण, डायन जैसे मामलों की पीड़िताओं के लिए सरकार सभी जिले में निर्भया केंद्र बनाएगी। ऐसी महिलाओं को केंद्र में मेडिकल कानूनी सहायता तो मिलेगी ही। उनकी काउंसलिंग कर मनोबल भी बढ़ाया जाएगा। उन्हें रहने-खाने कपड़े की सुविधा भी मिलेगी। केंद्र जिला अस्पताल परिसर में 300 वर्गमीटर जमीन पर बनेगा। प्रत्येक केंद्र के निर्माण पर लगभग 37 लाख रुपए खर्च होंगे। महिला एवं बाल विकास विभाग निदेशक के निर्देश पर भीलवाड़ा में जमीन चयन की प्रक्रिया शुरू हो गई है।
कलेक्टर ने जिला परिषद की अतिरिक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी प्रभा गौतम के नेतृत्व में तीन सदस्यीय कमेटी बनाई है। गौतम ने बताया कि कमेटी में महिला एवं बाल विकास विभाग की उप निदेशक दया सक्सेना तथा जिला अस्पताल के प्रमुख चिकित्साधिकारी डॉ.केसी पंवार भी हैं। कमेटी की मीटिंग बुधवार को है। शीघ्र ही जमीन चयन कर लिया जाएगा।
क्याहै योजना
केंद्रीय महिला एवं बाल विकास विभाग देश में 660 निर्भया केंद्र बनाएगा। प्रत्येक केंद्र निर्माण के लिए 37 लाख रुपए का प्रावधान किया है। इसका मकसद अंदर तक टूट चुकी हिंसा पीड़ित महिलाओं का मनोबल बढ़ा पुन: मुख्य धारा में लाना है। केंद्र 24 घंटे चलेगा।
हाईटेक होगा सेंटर
सेंटर के ग्राउंड फ्लोर पर प्रशासक, कार्यालय, काउंसलर, मेडिकल कंसल्टेंट के लिए एक-एक कमरा, रसोईघर, लॉबी, दो टॉयलेट होंगे। वीडियो कान्फ्रेंसिंग सुविधा होगी। पांच पलंग का वार्ड बनेगा।
क्या होगा फायदा
दुष्कर्म, सती, दहेज, ऑनर किलिंग, एसिड हमला, यौन उत्पीड़न, बाल विवाह, बाल यौन शोषण, डायन, वाणिज्यिक यौन शोषण के लिए तस्करी पीड़िताओं को केंद्र पर लाया जाएगा। उन्हें जरूरत पड़ने पर अस्पताल में भरती करवाना, पुलिस में एफआईआर दर्ज करवाने में मदद दी जाएगी। एक्सपर्ट काउंसलिंग भी करेंगे।
कमेटी करेगी प्रबंधन
केंद्र का प्रबंधन कलेक्टर की अध्यक्षता में गठित कमेटी करेगी। इसमें एसपी, जिला जज, बार काउंसिल चेयरमैन, मुख्य चिकित्साधिकारी, जिला कल्याण/कार्यक्रम अधिकारी, जिला परिषद सीईओ, सामाजिक संगठनों के तीन प्रतिनिधि होंगे। केंद्र का संचालन सिविल सोसायटी या एनजीओ द्वारा किया जाएगा।