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मिलों की चूक से अटका पांच हजार क्विंटल चीनी का वितरण

6 वर्ष पहले
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जिलेमें राशन की चीनी उपलब्ध होने के बावजूद वितरण नहीं किया जा रहा है। चीनी मिलों की चूक के कारण रसद विभाग चीनी बंटवाने से कतरा रहा है। क्योंकि उपलब्ध 5000 क्विंटल चीनी की पैकिंग पर यह सबूत नहीं है कि यह राशन की दुकानों पर बांटी जानी है।

रसद विभाग एवं खाद्य आपूर्ति निगम के माध्यम से राशन की दुकानों से बंटने वाली इस चीनी के वितरण पर आपूर्ति निगम एमडी ने रोक के आदेश जारी किए हुए हैं। चीनी की पैकिंग पर लॉट-बैच नंबर नहीं है वहीं इस जरूरी बिंदु का भी उल्लेख मिलों द्वारा नहीं कराया गया है कि ‘सब्सिडाइज्ड शूगर फोर पीडीएस’ है। यह चीनी जुलाई अगस्त माह में बांटी जानी थी, लेकिन उपलब्ध जनवरी में हो पाई।

यह चीनी जिले के पौने दो लाख परिवारों में बांटी जानी है। मामले को लेकर कमेटियां बनाई गई हैं जो जांच कर रिपोर्ट प्रस्तुत करेंगी। इसके बाद संबंधित मिलों पर पैनल्टी लगाई जाएगी। फिर इसके वितरण का रास्ता निकाला जाएगा। प्रति माह 291 मीट्रिक टन चीनी मिलती है। अभी 86 मीट्रिक टन चीनी जिले में और पहुंचनी है।

देर से आने के बावजूद नहीं बंट पाई

हरमाह चीनी आवंटन तय होता है, लेकिन यह कभी समय पर नहीं मिल पाती और इस बार तकनीकी खामी के कारण वितरण अटका हुआ है। यह चीनी जुलाई अगस्त की है जो दिसंबर से पहले तक जानी थी, लेकिन देरी हो जाने के बाद तय की गई अवधि में भी उपलब्ध नहीं हो पाई और अब इस वजह से वितरण नहीं हो पा रहा है। इस चीनी का वितरण जिले के 98 हजार 199 बीपीएल, 37 हजार 288 अंत्योदय 43 हजार 472 स्टेट बीपीएल परिवारों में प्रति व्यक्ति आधा किलोग्राम के हिसाब से 13.50 रुपए (प्रतिकिलो) की दर से करना है।

इसलिए रोक जरूरी

जिलारसद अधिकारी शंकरलाल ने बताया कि उपलब्ध चीनी के किसी कट्टे पर बैच एवं लॉट नंबर नहीं है तो किसी पर पीडीएस में बांटने का मिल ने उल्लेख नहीं किया है। चीनी पर पीडीएस का उल्लेख हो जाने से उसे बाजार में नहीं बेचा जा सकता। ऐसे करने पर अनियमितता पकड़ में जाती है, लेकिन पीडीएस का उल्लेख नहीं होने से अनियमितता की संभावना बनती है। इसलिए वितरण रोका है।

कमेटियां बनाएगी रिपोर्ट

क्रय-विक्रयसमितियां चीनी का उठाव करवाती हैं। इसकी जांच के लिए हर समिति के एक प्रतिनिधि कमेटी में होगा। जिला रसद अधिकारी आपूर्ति निगम प्रबंधक इस कमेटी में होंगे। कमेटी चीनी के कट्टों पर लॉट एवं बैच नंबर तथा सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत किए जाने वाले वितरण के उल्लेख की जांच करेगी। रिपोर्ट तैयार कर एमडी को भेजी जाएगी।