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स्कूल क्रमोन्नत, पर बजट मिला स्टाफ

6 वर्ष पहले
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एजुकेशन रिपोर्टर | भीलवाड़ा

शिक्षाविभाग ने स्कूल को प्राथमिक से उच्च प्राथमिक में क्रमोन्नत कर दिया, लेकिन वहां तो पर्याप्त स्टाफ लगाया और ही बजट दिया। वर्तमान में स्कूल में सात कक्षाएं चल रही हैं, लेकिन शिक्षक मात्र पांच हैं। अगले सत्र से यहां आठवीं कक्षा शुरू हो जाएगी लेकिन पर्याप्त कक्षा-कक्ष नहीं होने से विद्यार्थी कैसे पढ़ाई करेंगे।

यह नजारा हैं द्वारका कॉलोनी स्थित राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय जवाहरनगर का। वर्ष 2005 में जवाहरनगर से इस विद्यालय को द्वारका कॉलोनी में स्थानांतरित किया गया। जिसे गत साल उच्च प्राथमिक में क्रमोन्नत किया गया। पहली से सातवीं तक कक्षाओं में करीब 127 बच्चे पढ़ रहे हैं। गत साल कक्षा छह तक तथा इस साल सातवीं कक्षा में बच्चों को प्रवेश दिया गया। अगले साल आठवीं कक्षा शुरू करनी हैं, लेकिन कक्षा-कक्षों की कमी से परेशानी आएगी। स्कूल में किचनशेड खेल मैदान नहीं हैं। एक कमरे में पोषाहार पकाया जा रहा है। खेलकूद प्रतियोगिताओं के लिए बच्चों को अन्यत्र ले जाना पड़ता है।

प्रधानाध्यापक का पद रिक्त हैं। सफाईकर्मी नहीं हैं। पांच में से तीन अध्यापक डेपुटेशन पर लगे हैं। छात्र-छात्राओं के लिए अलग-अलग शौचालय बने हैं और सभी में टंकी रखवा कर पानी की व्यवस्था कर रखी हैं। पेयजल के लिए हैंडपंप लगा है।

दोबार हो चुकी चोरी

स्कूलमें दो बार चोरी हो चुकी हैं। एक बार चोर कमरे का ताला तोड़ कर गैस सिलेंडर ले गए जबकि दूसरी बार पोषाहार पकाने के बर्तन अन्य सामान चुरा ले गए। प्रतापनगर थाने में चोरी की रिपोर्ट भी दर्ज कराई, लेकिन चोरों का पता नहीं चला। इसके चलते चार दीवारी को ऊंचा कराया गया है।

हाजरीनंबर के अनुसार खोलते हैं बच्चे जूते

स्कूलमें सभी बच्चे हाजरी नंबर के अनुसार ही जूते खोलते हैं। इसके लिए स्कूल में प्रवेश करते ही बरामदे में जिस कक्षा में जितने छात्र हैं, उनके अनुसार नंबर अंकित किए गए हैं। स्कूल पहुंचते ही छात्र अपने हाजरी नंबर के सामने ही जूते उतार कक्षा में पहुंचते हैं।

अक्सर अनुपस्थित रहते हैं बच्चे

अध्यापिकापार्वती काकानी का कहना हैं कि स्कूल में अधिकतर फैक्ट्री लाइन में मजदूरी करने वालों के बच्चे अध्ययन करते हैं। इनमें से ज्यादातर तो उत्तर प्रदेश बिहार के हैं। इसके चलते वे कई बार परिवार के साथ अपने प्रदेशों में चले जाते हैं, जो करीब एक से डेढ़ माह तक नहीं लौटते। इससे उनका पढ़ाई का स्तर कमजोर हैं।