पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • मर्ज करने से स्कूल हुई दूर, 100 बच्चों ने टीसी कटवाई

मर्ज करने से स्कूल हुई दूर, 100 बच्चों ने टीसी कटवाई

6 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
राजकीयउच्च प्राथमिक विद्यालय को उच्च माध्यमिक विद्यालय में मर्ज कर दिया गया। चार महीने पहले उच्च प्राथमिक विद्यालय में 170 बच्चे पढ़ते थे। मर्ज किए स्कूल की दूरी ढाई किलोमीटर होने से अब स्कूल में मात्र 70 बच्चे ही रहे हैं। अभिभावकों ने बच्चों की टीसी कटवा ली है। इनमें से अधिकतर अभिभावकों ने बच्चों को निजी स्कूलों में एडमिशन दिला दिया है। कुछ बच्चे भीलवाड़ा मार्ग स्थित सरकारी स्कूल में पढ़ने लगे हैं तो कुछ बच्चे स्कूल से वंचित हो गए हैं।

गांव के बीच स्थित राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय को चार महीने पहले ढाई किलोमीटर दूर स्थित राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय में मर्ज किया गया। जब प्राथमिक स्कूल को मर्ज किया गया तब वहां 170 बच्चे पढ़ते थे। आज यह स्थिति है कि स्कूल की दूरी ज्यादा होने से अभिभावकों ने बच्चों की टीसी कटवाना शुरू कर दिया है। अभी स्कूल में मात्र 70 बच्चे पढ़ने रहे हैं। स्कूल मर्ज कर दिया गया लेकिन बच्चों को बैठाने के लिए पर्याप्त कमरें हैं और ही पढ़ाने वाले शिक्षक। स्थिति यह हो गई है कि दो या तीन कक्षाओं को साथ पढ़ाना पड़ रहा है।

पहले यह था नामांकन

राउप्राविमें 4 महीने पहले की स्थिति पर नजर डाले तो पहली कक्षा में 19 बच्चे पढ़ते थे। तीसरी से पांचवीं तक 70, छठी से आठवीं तक 80 बच्चों का नामांकन था। अब स्थिति यह हो गई है कि पहली कक्षा में 2, तीसरी से पांचवीं तक 30 और छठी से आठवीं तक की कक्षाओं के 40 बच्चे ही स्कूल पहुंच रहे हैं।

^बच्चों की उपस्थिति कम हो गई है। छोटी उम्र के बच्चे होने से अभिभावक उन्हें स्कूल नहीं भेज रहे हैं। मैंने कई बार अभिभावकों से बच्चों को स्कूल भेजने का अनुरोध किया। कमलेशखटीक, शिक्षक, राउप्रावि बागौर

केस एक

पहलीकी छात्रा काजल के पिता शिवलाल आचार्य ने बताया कि स्कूल ढाई किमी दूर चला गया। छोटी बच्ची को अकेली कैसे भेजें। मुख्य सड़क क्रॉस करनी पड़ती है। इससे दुर्घटना का भय बना रहता है। मैंने बेटी को निजी स्कूल में भर्ती करवा दिया है।

केसदो

तीसरीकक्षा के छात्र मनीष के पिता राजू बलाई ने बताया कि स्कूल दूर है। बच्चे को अकेला कैसे भेजे। मैं रोजाना भीलवाड़ा काम पर चला जाता हूं। बच्चे को स्कूल कौन छोड़ने जाए। इस कारण मैंने पास के स्कूल में बच्चे का एडमिशन करवा दिया है।