5 साल में घटता गया विकास बजट
पिछलेपांच वर्ष के दौरान हर बार नगर परिषद का बजट बढ़ा, विकास कार्यों पर खर्च को लेकर नहीं बल्कि परिषद कार्यालय में कार्यरत कर्मचारियों के वेतन-भत्तों एवं सुविधाओं पर। दूसरी ओर हर साल विकास पर बजट कम से कम होता चला गया। हालांकि गत बार के मुकाबले नए बजट में मामूली वृद्धि की गई है लेकिन पांच वर्ष पूर्व के बजट के मुकाबले यह 70 फीसदी ही है। शहर के विकास का कोई प्लान नहीं होने के कारण ही बजट के नाम पर कागजी खानापूर्ति होती आई है। बजट सिर्फ तय किया जाता है, उसे उतना खर्च नहीं किया जाता। चालू वर्ष में 34.60 करोड़ रुपए खर्च करने थे। इस राशि से शहर में निर्माण, मरम्मत, शहर सौंदर्यीकरण करना था लेकिन यह राशि 41 प्रतिशत ही खर्च की गई। ऐसा हर वर्ष किया जाता रहा है। पिछले बजट में विकास पर तय 27.82 करोड़ रुपए खर्च के बजाय 30 प्रतिशत राशि भी नहीं खर्च की गई।
विकास कार्यों पर पैसा खर्च करने में परिषद द्वारा रुचि नहीं दिखाई गई है। हर वर्ष तय बजट के मुकाबले आधी राशि भी खर्च नहीं की जा रही है।
29 प्रतिशतराशि खर्च की गई वर्ष 2012-13 में विकास मद में 40.65 करोड़ रुपए के स्थान पर।
28प्रतिशतराशि खर्च की गई वर्ष 2013-14 में 38.07 करोड़ रुपए में से
41प्रतिशतबजट खर्च किया जा सका वर्ष 2014-15 (चालू वर्ष) में 34.60 करोड़ रुपए के मुकाबले