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‘गरीब हूं, पाल नहीं सकता बच्चा, इसलिए छोड़ा पालने में’
‘गरीबहूं, तीन बच्चे हैं। इन्हें ही पालना मुश्किल हो रहा है। इस वजह से हमें चौथा बच्चा जन्म के एक दिन बाद ही पालने में रखने को मजबूर होना पड़ा।’ जिला अस्पताल में लगाए गए पालने में बुधवार दोपहर एक महिला द्वारा बच्चा छोड़कर जाने के बाद बाल कल्याण समिति उसके माता-पिता तक पहुंच गई और बातचीत के दौरान पिता ने अपना दर्द बयां करते हुए बच्चे को नहीं रख पाने की मजबूरी बताई। बाल कल्याण समिति ने समझाइश भी की, लेकिन नवजात के माता-पिता ने बार बार अपनी मजबूरी का हवाला देते हुए बच्चे को अपनाने से इनकार कर दिया। इसके बाद बच्चे को बाल कल्याण समिति ने अपने पास रख लिया। बुधवार को पालने में मिले इस नवजात का नाम बाल कल्याण समिति ने विनायक रखा है। इसका वजन 2 किलो 700 ग्राम है। बच्चा पूर्ण स्वस्थ है।
मौसीबच्चा रखकर जाने लगी तो घेर लिया लोगों ने
दोपहर में इस नवजात को उसकी मौसी पालने में रखकर जाने लगी तो वहां मौजूद लोगों को पता चल गया और उन्होंने उसे घेर लिया। इसके बाद पुलिस चौकी से स्टाफ वहां पहुंच गया और महिला को कुछ देर चौकी में रखा गया। इसके बाद उसे छोड़ दिया गया। इस दौरान बाल कल्याण समिति से संपर्क कर जानकारी दी गई। बाल कल्याण समिति ने उस महिला को बुलाया और नवजात के माता पिता से संपर्क किया।
पालने में आया तीसरा बच्चा
पालना लगने के बाद विनायक तीसरा बच्चा है, जिसे कोई इसमें छोड़ गया। पालना लगने के बाद पहला बच्चा 24 नवंबर, 14 को इसमें छोड़ा गया। इसका नाम प्रथम रखा गया। इसके बाद 17 दिसंबर को बालिका यहां छोड़ी गई, जिसे द्वितीया नाम दिया गया। बुधवार को मिले बालक को विनायक नाम दिया गया।
सुपुर्द भी कर सकते हैं बालक
पालना इसलिए लगाया गया है ताकि कोई पालन पोषण नहीं कर पाने या किसी अन्य मजबूरी के कारण अपना बच्चा पालने में छोड़ सकता है। यहां लगी घंटी कुछ देर में बजने लगती है, जिससे अस्पताल का स्टाफ वहां पहुंचकर बच्चे को ले जाता है। बच्चा छोड़कर जाने पर कोई सख्त कार्रवाई छोड़ने वाले पर नहीं की जाती। कोई चाहे तो सीधे बाल कल्याण समिति को भी बच्चा सुपुर्द कर सकता है।
दो माह का समय दिया
बाल कल्याण समिति द्वारा किशोर न्याय अधिनियम के तहत नवजात के माता पिता से सरेंडर डीड पर साइन करवाए गए हैं। वहीं उन्हें दो माह का समय भी दिया गया है।
इस दौरान वे चाहें तो अपना बच्चा ले जा सकते हैं। इसके बाद बच्चे को गोद देने की दिशा में प्रयास होंगे। उसके माता-पिता को बता दिया गया है कि एक्ट के अनुसार गोद दिए जाने के बाद वे बच्चे पर अधिकार नहीं जता सकेंगे और बालक किसे गोद दिया गया है यह भी नहीं बताया जाएगा।