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नेहरू विहार योजना का काम शुरू करने का आदेश

7 वर्ष पहले
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साढ़ेछह महीने काम अटका रहने के बाद शुक्रवार को नेहरू विहार योजना के संबंध में यूडीएच के आदेश यूआईटी को मिल गए हैं। यूआईटी सेक्रेट्री पीएस सांगावत ने बताया कि 20 ब्लॉक के 1,136 अधूरे मकानों का काम पुन: शुरू करेंगे और 34 ब्लॉक के 1,600 मकानों के लिए रि-टेंडर की प्रक्रिया शीघ्र शुरू की जाएगी।

गौरतलब है कि फरवरी, 2013 में ट्रस्ट मीटिंग के दौरान नेहरू विहार योजना के 2,736 मकानों को हरी झंडी दी गई थी। इसके बाद 20 ब्लॉक में 1,136 मकानों का काम शुरू हो गया था। बाकी टेंडर अंडर प्रोसेस में थे। चार मार्च, 2014 को भाजपा सरकार ने टेंडर्स में गड़बडिय़ों का हवाला देते हुए योजना पर रोक लगा दी। 25 अगस्त को उदयपुर में कैबिनेट मीटिंग में रोक हटा दी गई। इसके आदेश शुक्रवार को मिले हैं।

1 साल देरी से मिलेंगे घर

रि-टेंडरमें करीब तीन महीने लगेंगे। इस लिहाज से आवेदकों को मकान करीब एक साल देरी से मिलेंगे। जबकि यूआईटी ने आवेदकों से 165 करोड़ रुपए जमा करा लिए। रि-टेंडर होने से मकानों की कीमत बढ़ सकती है। आखिरकार जिम्मेदार कौन है?

सरकारभूली अनियमितता

>रि-टेंडर हर ब्लॉक के अलग-अलग होंगे जबकि सरकार ने इसी प्रक्रिया को अनियमितता माना था। सवाल उठता है कि पुराने नियमों के मुताबिक ही रि-टेंडर होने हैं तो योजना पर रोक ही क्यों लगाई? अनियमितता तो अभी भी है। आखिर रोक लगाने के पीछे सरकार की मंशा क्या थी? जनता को क्यों परेशान किया?

> सरकार का तर्क था कि कई टेंडर ऐसे थे जिन्हें मुख्यालय से अप्रूव कराना था लेकिन अधिकारियों ने अपने हिसाब से काम शुरू कर दिया। कई टेंडर एकल थे। अधिकांश की रेट बहुत ज्यादा थी। सवाल उठता है कि जब सरकार ने इसे अनियमितता माना तो संबंधित अधिकारियों पर विभागीय कार्रवाई क्यों नहीं की।

एसीबीको कौन लिखेगा

यूआईटीको मिले आदेश में मामले की एसीबी से जांच कराने का जिक्र है लेकिन एसीबी को कौन लिखेगा इसका जिक्र नहीं है। मुख्यालय ने भी एसीबी को नहीं लिखा है। यूआईटी अधिकारियों का कहना है कि इस संबंध में मार्गदर्शन मांगेंगे।