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विधायकों की राय के बाद स्कूलों का एकीकरण

7 वर्ष पहले
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जसराजओझा | भीलवाड़ा

सरकारीस्कूलों के एकीकरण मामले में अब संबंधित विधायक की राय लेना जरूरी हो गया है। स्कूलों को मर्ज करने से अधिकांश जगह विवाद की स्थिति बन गई है। कहीं ग्रामीणों ने बच्चों को स्कूल भेजना बंद कर दिया है तो कहीं गांव की बेटियां उस स्कूल के बच्चों को पढ़ा रही हैं। इन्हीं विवाद को खत्म करने के लिए सरकार ने ऐसा किया है।

शिक्षा विभाग के संयुक्त शासन सचिव आरसी ढेनवाल ने सभी कलेक्टर्स को आदेश जारी किए हैं कि वे एकीकरण के संबंध में संबंधित विधायकों से विचार-विमर्श करने के बाद ही संशोधित रिपोर्ट भेजें। गौरतलब है कि जिले में मर्ज हुए 871 स्कूलों में 145 में आपत्तियां प्राप्त हुई हैं। इसमें कहीं नदी-नाले तो कहीं स्कूल दूर पड़ते हैं। ऐसे में छोटे बच्चों को स्कूल जाने में असुविधा हो रही है। डीईओ जीवराज जाट ने बताया कि एकीकरण के संशोधित निर्देशों के दायरे में रहे स्कूल तथा विधायकों को प्राप्त हुई समस्याओं तथा स्कूलों की विशेष परिस्थितियों के संबंध में चर्चा होगी। इसके बाद ही सात दिन में रिपोर्ट भेजी जाएगी।

एकीकरणके संबंध में यह रहेंगे नियम

> आदर्श स्कूल तथा मर्ज हुए स्कूल एक ही राजस्व गांव में होना जरूरी है। यदि दूसरे गांव में मिला दिया है तो उसे यथावत रखा जाएगा। शून्य नामांकन वाले स्कूल को अन्य राजस्व गांव में मर्ज किया जा सकता है।

> आरटीई के तहत प्रत्येक एक किमी में प्रावि तथा दो किमी में उप्रावि होना जरूरी है। यदि इस दूरी से ज्यादा स्कूल मर्ज हो गए हैं तो उन्हें यथावत रखा जाएगा।

> प्रावि सामान्य में 60, एससी बस्ती में 30, उप्रावि में 150, बाउप्रावि में 60 बच्चों का नामांकन होना जरूरी है। इसमें मावि में 200 बच्चों का नामांकन होना चाहिए।

> कक्षा छह से आठ तक चलने वाली बालिका स्कूलों में पर्याप्त नामांकन होने पर उन्हें अलग रखा जा सकता है।

> आदर्श स्कूलों तक पहुंचने में जंगल, पहाड़ी, हाईवे, रेलवे लाइन, नदी-नाले आदि आते हैं तो विशेष परिस्थितियों में ऐसे स्कूलों को यथावत रखा जा सकता है।

पुराने भवनों में ही चल रहे हैं अधिकांश स्कूल

सरकार ने भले ही जिले में 871 स्कूलों का एकीकरण कर दिया परंतु मौके पर अभी यह स्कूल पुराने भवनों में ही चल रहे हैं। किसी स्कूल में पर्याप्त कक्षाकक्ष नहीं होने का तर्क दिया है तो कहीं बच्चे नहीं आने की बात कही गई