भीलवाड़ा। नेहरू रोड पर डिवाइडर में लगाए गए पौधों की सेफ्टी के लिए यूआईटी थोर कांटे लगा रहा है। टेक्सटाइल सिटी में पहली बार ऐसा देखने में आया है कि शहर के बीचोंबीच फोरलेन रोड पर थोर कांटे लगाए जा रहे हैं। जबकि इस रोड को चौड़ा करने से पहले यूआईटी अधिकारियों ने इसे शहर की मॉडल रोड बनाने का दावा किया था।
दो साल बाद भी अधिकारियों के दावे हकीकत नहीं बन सके लेकिन इससे बुरी स्थिति और क्या हो सकती है कि मॉडल रोड पर थोर कांटे लगाए जा रहे हैं। मॉडल रोड की सुंदरता के लिए अच्छी रेलिंग या पत्थरों की डिजाइन लगाई जानी चाहिए थी लेकिन यूआईटी अधिकारी शायद कंटीली झाडिय़ां से इस रोड की सुंदरता बढ़ाना चाहते हैं।
नहीं लिखे नाम भी : नेहरू रोड को चौड़ा करने के लिए अक्टूबर, 2012 में 124 मकान तोड़े गए थे। स्वेच्छा से मकान तोड़ने की अनुमति देने वालों के नाम बोर्ड पर लिखवाने का भी अधिकारियों ने दावा किया था, लेकिन इस दावे को भी अधिकारी पूरा नहीं कर पाए।
उद्यान निरीक्षक कहते हैं ''पौधोंकी सेफ्टी के लिए रेलिंग लगानी थी लेकिन प्लानिंग बदल जाने से टेंडर रोक दिए हैं। जिस ठेकेदार ने पौधे लगाए हैं सेफ्टी उसे ही करनी है। इसलिए वह थोर कांटे लगा रहा है।'' -रफीक मोहम्मद, उद्याननिरीक्षक, यूआईटी।
(भीलवाड़ा. नेहरू रोड डिवाइडर पर लगे पौधों की सुरक्षा के लिए यूआईटी द्वारा लगाए गए थोर कांटे। )