पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • मेडिसिन प्लांट रसभरी में है एंटी कैंसर प्राॅपर्टी

मेडिसिन प्लांट रसभरी में है एंटी कैंसर प्राॅपर्टी

7 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
नेशनलबॉटनिकल रिसर्च इंस्टीट्यूट, लखनऊ के साइंटिस्ट डॉ. कमलेशसिंह महर बालेश्वर पौधों पर रिसर्च के लिए शनिवार को भीलवाड़ा आए। उन्होंने यहां एमएलवी गवर्नमेंट कॉलेज में वनस्पति शास्त्र के लेक्चरर डॉ. केएल मीणा से विभिन्न प्रजातियों के बारे में जानकारी ली।

डॉ. महर रसभरी (फाइसेलिस) पौधे के मेडिसन यूज और इसकी जेनेटिक डायवर्सिटी पर रिसर्च कर रहे हैं। बालेश्वर काउंसिल ऑफ साइंटिफिक एंड इंडस्ट्रियल रिसर्च, नई दिल्ली द्वारा मेडिसन इकोनोमिकल उपयोगी पौधों के लिए तैयार किए जा रहे जेनेटिक बार कोड के लिए विभिन्न पौधों की प्रजातियों पर रिसर्च कर रहे हैं।

रसभरी से ब्लड भी होता प्योिरफाई

साइंटिस्टडॉ. महर ने बताया कि मेडिसन प्लांट रसभरी में सेपोनिन रसायन अधिक होने से इसका उपयोग कब्जी दूर करने और शरीर पर होने वाले फोड़े-फुंसियां को ठीक करने में होता है। इससे ब्लड प्योरिफाई भी होता है। प्रारंभिक रिसर्च में सामने आया है कि इसकी जड़ों में एंटी कैंसर प्रॉपर्टी होती है। अभी देश में मौजूद रसभरी की प्रजातियों के बारे में पता कर रहे हैं। इससे पता चलेगा कि कौन सी प्रजाति किस परिस्थितियों में खुद को परिवर्तित कर सकती है। यह पता लगने पर किसी एक एरिया में रसभरी पौधे नष्ट होने पर दूसरे एरिया के पौधों को वहां शिफ्ट किया जा सकता है। फ्रूट प्रोडक्शन कैसे बढ़ाया जाए, इस पर भी रिसर्च चल रहा है। अब तक पंजाब, जम्मू जोधुपर से पौधे इकट्ठे किए हैं।

पौधोंका बनेगा जेनेटिक बार कोड

साइंटिस्टबालेश्वर ने बताया कि काउंसिल ऑफ साइंटिफिक एंड इंडस्ट्रियल रिसर्च, नई दिल्ली देश में पाए जाने वाले मेडिसन इकोनोमिकल उपयोगी पौधों की प्रजातियों का जेनेटिक बार कोड तैयार कर रही है। नेशनल बॉटनिकल रिसर्च इंस्टीट्यूट, लखनऊ को 40 पौधों पर रिसर्च की जिम्मेदारी दी है। कोड तैयार होने के बाद इसके जरिए विभिन्न प्रजातियों की विशेषता, विभिन्नता, उपयोग और लोकेशन पता की जा सकेगी। उन्होंने डॉ. केएल मीणा से जिले में पाई जाने वाले मेडिसन प्लांट सिंदूरी, अरवी, माल कांगनी, ब्राह्मी आदि के बारे में जानकारी ली।

पौधों पर रिसर्च के लिए आए लखनऊ के वैज्ञानिक