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नप ने विकास पर खर्च नहीं की आधी भी राशि

6 वर्ष पहले
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वर्तमानबोर्ड के अंतिम बजट में भी विकास की उपेक्षा कर दी गई। शहर के सौंदर्यीकरण, सड़क निर्माण और बिजली लाइनों के विस्तार जैसे जनता से जुड़े कार्यों पर चालू वर्ष में निर्धारित ‘पैसा’ खर्च नहीं किया जा सका। पिछले बजट में विकास कार्य पर 34.60 करोड़ रुपए खर्च करना तय किया गया था। नए बजट में इसमें सवा करोड़ रुपए से ज्यादा की कटौती कर दी गई है।

चालू वर्ष के लिए पिछले साल तय की गई विकास की राशि खर्च करने में परिषद ने कंजूसी बरती और महज 41 फीसदी ही खर्च की गई। शहर का बेहतर रखरखाव किया जा सका और ही नए निर्माण किए गए। बोर्ड के इस कार्यकाल में जब पहला बजट आया तो विकास पर 46 करोड़ रुपए खर्च तय किया। अंतिम बजट में यह 33.3 करोड़ रुपए तय किया गया है। यानी इन पांच वर्ष में विकास पर खर्च बढ़ाने के बजाय परिषद द्वारा हर बार घटा दिया गया।

मवेशियों को मिलेगी गोशाला में जगह

गोसेवासमिति की गोशाला में शहर में आवारा फिर रहे मवेशियों को शिफ्ट किया जाएगा। इस पर मीटिंग में मामूली तर्क-वितर्क के बाद सहमति बनी। आटूण में समिति के भूखंड पर गायों को शिफ्ट किया जाएगा। चारा, पानी देखरेख की व्यवस्था के लिए प्रति गोवंश 50 रुपए प्रतिदिन का खर्च आएगा, जो परिषद द्वारा संस्था को दिया जाएगा। इस मामले पर कांग्रेस पार्षदों ने विरोध करते हुए कहा कि अनुदान देने के बजाय परिषद अपने स्तर पर काइन हाउस में गायों का पालन-पोषण करे तो ज्यादा बेहतर हो। महेंद्र घबरानी ने आरोप लगाया कि हरणी महादेव में शिवरात्रि मेला आयोजन बिना मेला आयोजन समिति के करवा दिया जाता है।

30 लाख रुपए रिफंड के प्रस्ताव पर मचा शोर

कांवाखेड़ाआवासीय भूखंड खुली नीलामी की अंतिम बोली माया सर्राफ के नाम 1.20 करोड़ रुपए में छूटी लेकिन भूखंड के 30 लाख रुपए ही जमा कराए। शेष राशि जमा नहीं करवाई गई। बाद में यह पैसा भी मय ब्याज लौटाने की मांग की गई। कांग्रेसी पार्षद इस प्रस्ताव के विरोध में गए। उनका तर्क था कि बोर्ड का पैसा लेने का तो अधिकार है,पर रिफंड की स्वीकृति का नहीं। तय समय में पूरा पैसा जमा नहीं होने पर नियमानुसार 30 लाख रुपए भी जब्त होने चाहिए थे, लेकिन मीटिंग में रिफंड की बात की जा रही है। उप नेता शिवराम खटीक, पार्षद मनोज पालीवाल, महेंद्र घबरानी , केदार जागेटिया, उस्मान पठान आदि डायस के पास गए और जोर-जोर से बोलने लगे। हंगामा बढ़ता देख भाजपा पार्षद अनिल जैन, ललित अग्रवाल, मुकेश शर्मा आदि भी डायस के पास गए। ये पार्षद एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगाते हुए आपस में ही उलझ गए। तब सभापति विधिक राय लेकर कार्रवाई करने का आश्वासन दिया तब मामला शांत हुआ। वहीं कैलाश कोठारी के भूखंड उपविभाजन को खारिज करने की मांग की गई।