लॉ कॉलेज को मिली अस्थाई मान्यता
गवर्नमेंटलॉ कॉलेज को वर्ष 2014-15 के लिए अस्थाई मान्यता मिल गई है। मान्यता मिलने से फर्स्ट इयर स्टूडेंट के एग्जाम फॉर्म भरने और वर्ष 2012-13 2013-14 की अटकी मार्कशीट्स मिलने का रास्ता साफ हो गया है।
मान्यता नहीं होने के कारण एमडीएस यूनिवर्सिटी ने देरी से एडमिशन की अनुमति दी थी। लॉ कॉलेज में एडमिशन हुए तब तक एकेडमिक कॉलेजों में एग्जाम फॅार्म भरे जा चुके थे। अब दूसरे कॉलेजों में प्रेक्टिकल एग्जाम शुरू हो गए लेकिन लॉ कॉलेज में अभी तक एग्जाम फॉर्म ही नहीं भरे नहीं गए थे। इस साल अस्थाई मान्यता मिलने से यूनिवर्सिटी द्वारा अब एग्जाम फॉर्म भरने की भी अनुमति मिल जाएगी। फॉर्म भरने का प्रोसेस इसी सप्ताह शुरू हो सकता है।
क्याहै मामला
वर्ष2005 में निदेशालय ने प्रशासनिक आदेश से एमएलवी कॉलेज के लॉ संकाय को कॉलेज घोषित किया। स्वतंत्र नियम नहीं होने से वर्ष 2010-11 तक कॉलेज संकाय के रूप में चलता रहा। वर्ष 2011-12 से बीसीआई ने अस्थाई एडमिशन की अनुमति दी। सालों बाद भी निर्धारित मापदंड पूरी नहीं होने से इस साल बीसीआई ने बिना मान्यता एडमिशन देने से मना कर दिया। पिछले दो साल से बिना मान्यता के ही एग्जाम हो गए। अगले साल तक स्थाई मान्यता नहीं मिली तो फिर वहीं एडमिशन एग्जाम की समस्या होगी।
स्टाफसुविधाओं की कमी
अबतक लॉ कॉलेज एमएलवी कॉलेज की बिल्डिंग में संचालित होने से बीसीआई की शर्तें पूरी नहीं होने से बीसीआई मान्यता नहीं दे रही थी। इसी साल कॉलेज नई बिल्डिंग में शिफ्ट हो गया लेकिन कॉलेज में बीसीआई के नियमानुसार स्टाफ सुविधाएं नहीं होने से स्थाई मान्यता में अड़चनें आएगी। कॉलेज प्रशासन बीसीआई टीम के निरीक्षण के लिए 1.50 लाख रुपए जमा करा चुका है। स्टाफ नहीं होने से स्थाई मान्यता का मामला अटक सकता है। मापदंड पूरे नहीं होने से बीसीआई टीम इंस्पेक्शन के लिए नहीं आई।
स्थाईमान्यता के लिए जरूरी
{स्टाफ: एलएलबीपाठ्यक्रम के लिए एक प्रिंसिपल 10 लेक्चरर चाहिए जबकि यहां एक प्रिंसिपल दो लेक्चरर है। लेक्चरर के पांच पद स्वीकृत है। क्लास लेने के लिए बाहर से एडवोकेट बुलाते हैं। मंत्रालयिक कर्मचारी संविदा पर हैं।
{ फर्नीचर:कॉलेजमें स्टाफ स्टूडेंट्स के लिए फर्नीचर की पूरी व्यवस्था नहीं है।
{ लाइब्रेरियन:आधी-अधूरीलाइब्रेरी है। लाइब्रेरियन का पद खाली है।
डिग्रियांहो सकती हैं अमान्य
अधिवक्ताअधिनियम 1961 की धारा 7 के अंतर्गत बीसीआई द्वारा बनाए विधि शिक्षा नियम-2008 के नियम 14 में कहा गया कि बीसीआई द्वारा बिना मान्यता वाले कॉलेज की डिग्री अमान्य होगी और स्टूडेंट्स किसी भी प्रतियोगी परीक्षाओं में नहीं बैठ सकेंगे। बिना मान्यता वाले कॉलेज से डिग्री लेने पर उसे गैर व्यवसायिक माना जाएगा।