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गड़े मृत मोर आज निकाले जाएंगे

7 वर्ष पहले
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{ उपवन संरक्षक बीपी पारीक ने कहा, जलाना चाहिए था, हम गलती सुधारेंगे

भास्करन्यूज | भीलवाड़ा

मेवाड़मिल परिसर में मृत मिले मोरों को गाड़े जाने की नियम विरुद्ध कार्रवाई को गलत मानते हुए वन विभाग गलती सुधारने जा रहा है। बुधवार को हरणी महादेव स्थित नर्सरी में गाड़े मोरों को निकाला कर उन्हें जलाया जाएगा। उपवन संरक्षक बीपी पारीक ने बताया कि संभवत: मृत मोरों के अवशेष मिलेंगे, उन्हें वापस तय नियमों के अनुसार जलाया जाएगा। राजस्व, पुलिस और जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी में उन्हें जलाने की कार्रवाई होगी। उल्लेखनीय है कि दैनिक भास्कर ने अनुसूची प्रथम में शामिल मोरों के सम्मान से जुड़ा मुद्दा प्रमुखता से उठाया था। भास्कर में ‘विवाद बना मोरों को दफनाना’ खबर प्रमुखता से प्रकाशित की गई जिसके बाद वन मंत्रालय ने मामले की जांच शुरू कराई। जांच में चीफ वाइल्ड लाइफ वार्डन एसएन सिंह ने विभाग की चूक मानते हुए मोरों को जलाने के संबंध में सर्कुलर जारी किया। मिल में 23, 24 29 नवंबर को कुल 23 मोरों के शव प्राप्त हुए थे।

9 िदसंबर को प्रकाशित खबर

मेवाड़ मिल में आगे भी शिकार का अंदेशा

मेवाड़मिल परिसर में विभागीय अधिकारियों द्वारा की गई खोजबीन अब बंद हो गई है, लेकिन मोरों की मौत के बाद कार्रवाई शुरू की गई तो उस दौरान निरीक्षण में मक्का गेहूं के दाने यहां-वहां बिखरे हुए मिले थे, जिनके सैंपल लिए गए।

राष्ट्रीय पक्षी मोर की मौत के मामले प्रदेशभर में हुए। बूंदी में इस वर्ष करीब सौ मोर मारे गए थे, खासकर नैणवा में। जहां कुछ मामलों में शवों को नष्ट कराकर वन विभाग ने मामले दर्ज ही नहीं किए। मामला उठा लेकिन ठंडे बस्ते में जा पहुंचा। नैणवा में मार्च और अप्रैल में करीब सौ मोर मृत मिले थे। मेवाड़ मिल में मारे गए मोरों के मामले में महकमे की कार्रवाई को अब उनके अधिकारी ही बहुत बड़ी गलती मानकर सुधार करने जा रहे हैं।