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- 2012 में भर्ती शिक्षकों की नौकरी पक्की पर स्थाईकरण अटका
2012 में भर्ती शिक्षकों की नौकरी पक्की पर स्थाईकरण अटका
{ सितंबर में प्राेबेशन पूरा होने के बावजूद वेतन नहीं बढ़ने से होगा विवाद
भास्करन्यूज | भीलवाड़ा
जिलापरिषद द्वारा आयोजित शिक्षक भर्ती 2012 में संशोधित परिणाम में प्रभावित हो रहे 233 शिक्षकों को अब नौकरी जाने का खतरा नहीं है। इस संबंध में सोमवार को हाईकाेर्ट ने इन शिक्षकों के पक्ष में फैसला किया था। नवनियुक्त शिक्षक संघर्ष समिति के प्रदेश प्रवक्ता रामसिंह सुमित मुरारी ने 2012 में चयनित शिक्षकों की समस्याओं के संबंध में जिला परिषद सीईओ को पत्र लिखा है। इसमें बताया कि सीकर में डीईओ ने प्रोबेशन पूरा होने पर शिक्षकों के बढे हुए वेतन दिलाने के आदेश दे दिए हैं। उधर जिले में 1973 शिक्षकों का प्रोबेशन सितंबर में ही पूरा होने पर इन्हें बढ़ा हुआ वेतन नहीं मिल रहा है। 2012 की भर्ती में सैकंड लेवल (कक्षा छह से आठ) तक के लिए 1765 प्रथम लेवल (कक्षा एक से पांच)तक के लिए 208 शिक्षकों को पोस्टिंग दी गई थी। गुर्जर ने बताया कि 14 दिसंबर को सुबह 11 बजे मुखर्जी उद्यान में मीटिंग आयोजित की जाएगी। इसमें जिले के सभी नवनियुक्त शिक्षक भाग लेंगे। इसमें प्राेबेशन पूरा होने पर भी स्थाईकरण नहीं होने की समस्या पर चर्चा की जाएगी।
मामला अभी विवादों में
^2012में हुई ग्रेड थर्ड शिक्षक भर्ती का मामला अभी विवादों में हैं। विभाग के स्तर पर कार्रवाई चल रही है। फिलहाल इस भर्ती में यथास्थिति के आदेश है, इसलिए किसी का स्थायीकरण नहीं किया गया। सुभाषशर्मा, डीईओप्रारंभिक
2013 की भर्ती का नहीं आया रिजल्ट
जिलापरिषद ने ग्रेड थर्ड शिक्षक भर्ती 2013 में 808 पदों के लिए परीक्षा ली। इसका अभी तक परिणाम जारी नहीं हुआ है, जबकि 2014 भी पूरा होने को है। इन शिक्षक भर्ती परीक्षाओं का रिजल्ट नहीं आने से स्कूलाें में भी शिक्षकों की कमी पूरी नहीं हो रही है।
शुरू से विवादों में रही यह भर्ती
शिक्षकभर्ती 2012 शुरू से ही विवादों में रही और अभी तक समाधान नहीं हुआ। इसमें दो बार परिणाम संशोधन हुआ। चयन के बाद 233 अभ्यर्थी मेरिट से बाहर हुए। पहले हटाने के आदेश हुए थे परंतु अब नहीं हटेंगे। भीलवाड़ा में एक ही सबजेक्ट के अलग-अलग पेपर आए। अभ्यर्थियों ने ओएमआर शीट देखी तो कई सवालों के जवाब सही होने पर भी गलत किए। इस परीक्षा से संबंधित करीब 1563 शिकायतें जिप में आई थीं। इनमें से अधिकांश मामले भर्ती में अनियमितताओं के ही है