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रोडवेज में स्टाफ कम फिर भी पाटा घाटा

5 वर्ष पहले
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भास्कर संवाददाता | भीलवाड़ा

भीलवाड़ारोडवेज डिपो ने स्टाफ कम होने के बाद घाटे का बड़ा अंतराल पाटा है। यह प्रदेश के पहले चार ऐसे डिपो में शामिल हो गया जिन्होंने घाटा कम करने में बेहतर प्रयास किए। इसके लिए रोडवेज के एमडी राजेश यादव ने हाल ही मीटिंग में डिपो स्तर पर किए प्रयासों की सराहना की है।

राजस्थान रोडवेज के भीलवाड़ा आगार को नवंबर, 2014 में 90 लाख रुपए का घाटा हुआ था। इसे नंवबर, 2015 में 65 लाख रुपए तक कवर किया।

हालांकि डिपो उस महीने में भी 25 लाख रुपए नुकसान में था। इसी तरह दिसंबर 2014 में घाटा 84 लाख रुपए का था जो दिसंबर, 2015 में 54 लाख रुपए कवर करके 30 लाख रुपए रह गया।

सामूहिक प्रयास कारगर रहे

डिपोमैनेजर सुधीर दीक्षित के का दावा है कि घाटा कम करने की विभिन्न योजनाएं एवं स्टाफ के सामूहिक प्रयास कारगर रहे हैं। चालक-परिचालकों को प्रोत्साहित करने के साथ ही जांच व्यवस्था दुरुस्त की गई। पिछले सालों की तुलना में डीजल के भाव भी कम हुए हैं। “मेरी बस-मेरा रूट’ योजना लागू होने से घाटा और भी कम होने की उम्मीद है।

51 कंडक्टर कम, ट्रैफिक इंस्पेक्टर तो एक भी नहीं

भीलवाड़ाडिपो में ड्राइवर के 196 पद स्वीकृत हैं इनमें से अभी 132 कार्यरत हैं। यानी 64 चालक कम हैं। परिचालकों के कुल 231 पद हैं जबकि 180 कार्यरत हैं। डिपो के लिए कम से कम 180 परिचालक रूट के लिए ही चाहिए। इसके अलावा 37 बुकिंग कंडक्टरों (पत्रक वितरक) की आवश्यकता है। लेकिन केवल एक ही कार्यरत होने से 36 कंडक्टरों से बुकिंग कंडक्टर का काम कराया जाता है। यातायात निरीक्षक के 3 एवं सहायक यातायात निरीक्षक के 6 पद स्वीकृत हैं। वर्तमान में सभी खाली पड़े हैं। मैकेनिकों सहित लगभग हर विभाग में कर्मचारियों की कमी है।

भीलवाड़ा डिपो घाटा कम करने में प्रदेश में चौथे स्थान पर आया, फिर भी महीने में 30 लाख तक का नुकसान

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