फॉरेस्ट एनओसी की डेडलाइन दी
चंबलप्रोजेक्ट के इंजीनियरों ने शुरुआत में जो नक्शा पेश किया उसमें बूंदी जिले के वन क्षेत्र को भूल गए और काम शुरू कर दिया। वन भूमि में स्वीकृति मांगी सिर्फ पाइप लाइन डालने की। बाद में याद आया कि यहां से सड़क भी निकालनी पड़ेगी और बिजली लाइन भी डालनी पड़ेगी। इस पर जाकर मामला फंस गया। एक बार पहले मंजूरी जारी हो चुकी थी। फिर रिवाइज प्रपोजल तैयार करवाने पड़े। अब चित्तौड़गढ़ भीलवाड़ा जिले में वन अधिकार अधिनियम (एफआरए) के तहत सर्टिफिकेट जारी होना है। इसके लिए संबंधित पंचायत मुख्यालय पर ग्रामस्तरीय मीटिंग में अनुमोदन होगा। यहां की प्रोसेडिंग एसडीएम के पास आएगी। फिर एक मीटिंग कर उसकी प्रोसेडिंग तैयार की जाएगी। दोनों प्रोसेडिंग रिपोर्ट के साथ कलेक्टर के यहां मीटिंग होगी। इसी फाइनल प्रोसेडिंग के साथ वन अधिकार अधिनियम का सर्टिफिकेट तैयार होगा। इसके साथ प्रपोजल वन एवं पर्यावरण मंत्रालय के लखनऊ स्थित रीजनल मुख्यालय भेजा जाएगा। जहां से एनओसी जारी होगी। 28 फरवरी तक यह प्रपोजल लखनऊ भेजना है।
एनएच में परेशानी का 19 तक करना है समाधान
अगरपुराके पास से निकल रहे राष्ट्रीय राजमार्ग के पास भूमि के मुआवजा का मामला हल नहीं हुआ। जहां से हाईवे निकलना है वहां 140 मकान हैं। मुख्य सचिव सीएस राजन ने सभी परिवारों की सहमति को लेकर एनएच के अफसरों से प्रश्न किए। अफसरों ने बताया कि 140 में से 127 परिवारों की सहमति मिल चुकी है। 13 अन्य की सहमति लेने के प्रयास कर रहे हैं। राजन ने इसके लिए भी 19 फरवरी तक फाइल दिल्ली मुख्यालय भेजने को कहा है।
जयपुर में मुख्य सचिव ने चंबल प्रोजेक्ट हाईवे अधिकारियों की बैठक ली
{16 फरवरी तक भीलवाड़ा चित्तौड़गढ़ जिलों के कलेक्टरों से मांगे सर्टिफिकेट
{ वन अधिकार अधिनियम (एफआरए) सर्टिफिकेट 28 फरवरी तक लखनऊ भेजना होगा