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देशभर के मेडिकल कॉलेज मिलकर करेंगे मलेरिया पर शोध

7 वर्ष पहले
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मलेरियावाइवेक्स (पीवी) जानलेवा है। बीकानेर में यह शोध कई साल पहले हो गई और इसके नतीजों को देख ब्राजील (बार्सिलोना) ने यहां के कॉलेज से मिलकर अध्ययन किया। इसकी गंभीरता पूरे देश में एक समान है या नहीं यह जानने के लिए इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) अब पूरे देश के चुनिंदा मेडिकल कॉलेजों में एक साथ अध्ययन करने जा रहा है। प्रदेश के मेडिकल कॉलेज भी इसमें शामिल हाेंगे। इस लिहाज से आईसीएम की आर राजस्थान ब्रांच डीएमआरसी जोधपुर में रविवार को एक एमओयू साइन होगा। इस एमओयू पर दस्तखत करने बीकानेर से मेडिकल कॉलेज प्राचार्य डा.आर.ए.बंब रवाना हुए हैं। मेडिसिन विभाग की ओर से डा.संजय कोचर भी वहां पहुंच शोध प्रमुख के नाते हस्ताक्षर करेंगे।

डा.कोचर के मुताबिक इस शोध में देशभर से मलेरिया रोगियों के डागा संग्रहीत कर उनमें रोग की गंभीरता और जटिलता की समानताएं तलाशी जाएगी। इसके साथ ही अलग-अलग जगहों पर दिए जाने वाले उपचार के नतीजों का भी अध्ययन होगा। इस विस्तृत अध्ययन के बाद मलेरिया के उपचार पर देशभर में एक अलग गाइड लाइन या नीति बनने की भी संभावना है।

गंभीरता से नहीं पढ़ाते श्वांस की बीमारी

देशभरमें श्वांस की बीमारी के मरीज सर्वाधिक है लेकिन इस बीमारी के कारण, उपचार आदि के बारे में एमबीबीएस के दौरान विस्तृत पढ़ाई नहीं करवाई जाती। ऐसे में गांवों से लेकर शहरों तक में नियुक्त होने वाले ये डाक्टर पूरी तरह इलाज नहीं कर पाते। इतना ही नहीं कॉलेजों के मेडिसिन विभागों में इस बीमारी के उपचार के पूरे संसाधन नहीं होते। इससे इतर टीबी-चेस्ट डिपार्टमेंट में मरीज जाना नहीं चाहते। श्वांस की बीमारी से जुड़े कुछ ऐसे ही तथ्य देशभर के विशेषज्ञों की पुणे में हुई विचार-मंथन मीटिंग में सामने आए। शनिवार को हुई इस मीटिंग में बीकानेर से शिरकत कर रहे डा.संजय कोचर ने बताया, चेस्ट रिसर्च फाउंडेशन की इस मीटिंग में हुए विचार-विमर्श के आधार पर उपचार एवं अध्ययन सामग्री में बदलाव के बिंदु भी तैयार होंगे।