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फसलों पर बेअसर रहेगा मौसम

6 वर्ष पहले
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मौसममें भले ही आए दिन बदलाव हो रहा हो मगर फसलों पर इसका कोई असर नहीं होगा। चना सरसों में फूल आने वाले हैं। कुछ जगह फलियां भी आने लगी है। उसके लिए वर्तमान में चल रहा तापमान मुफीद है। गेहूं-जौ अभी बढ़वार पर हैं। इस कारण उस पर तापमान का उतार-चढ़ाव विशेष असर नहीं डालेगा। दो सप्ताह तक मौसम के तेवर फसलों का कुछ नहीं बिगाड़ सकेगा मगर उसके बाद परेशानी हो सकती है। कृषि विभाग के जानकार मानते हैं कि फरवरी के तीसरे सप्ताह तक औसत 20 डिग्री सेल्सियस तापमान फसलों के लिए सही माना जाता है।

इन दिनों कमोबेस ये ही औसत इन रह रहा है। फरवरी के अंत में तापमान बढ़ेगा लेकिन कृषि वैज्ञानिक मानते हैं कि गेहूं की बढ़वार के लिए तापमान का बढ़ना भी जरूरी है। हां, यदि फरवरी के अंत तक तेज आंधी के साथ हवा चली या ओलावृष्टि हुई जिसकी आशंका जताई जा रही है तो फसलों को नुकसान होने की आशंका है। हालांकि अब तक मौसम विभाग ने इस तरह की कोई चेतावनी नहीं दी है मगर माना जा रहा है कि फरवरी के अंत तक मौसम फिर से करवट बदलेगा।

कैसे बचें

फरवरी-मार्चमें एकाएक तापमान बढ़ने से यदि फसलें सूख रही हो तो उससे बचने के लिए थायो-यूरिया के 250 ग्राम के दो स्प्रे फसलों में छिड़काव करने से सिंचाई की कम जरूरत पड़ेगी। जहां पानी की सुविधा है वहां अधिक सिंचाई से फसलों को बचाया जा सकता है।

क्या हो सकता है खतरा

{ओलावृष्टि: फरवरीमें फसलों को सबसे अधिक खतरा ओलावृष्टि से होता है। पिछले तीन सालों से फरवरी में बारिश और ग्रामीण क्षेत्रों में ओलावृष्टि हो चुकी है। इस साल भी पिछले सप्ताह गांव में ओलावृष्टि हो चुकी है। हालांकि अभी इतना खतरा नहीं है लेकिन फरवरी के अंत में यदि ऐसा हुआ तो फसलों को नुकसान होगा।

{पाळा: 2007में तीन से सात मार्च तक तापमान इतना कम हो गया था कि पाळा पड़ गया था। जानकारों का मानना है कि यदि पहाड़ी इलाकों में बर्फबारी हुई तो उसके दो से तीन दिन बाद असर बीकानेर में होता है। इस कारण फरवरी के अंत तक मौसम कभी भी बदल सकता है।

{तापमानमें बढ़ोतरी : फसलोंके लिए तीसरा खतरा एकाएक तापमान में बढ़ोतरी खतरा है। कई बार होली से पहले तापमान 35 डिग्री सेल्सियस से ऊपर हो जाता है। ऐसे में सबसे अधिक नुकसान गेहूं और जौ की फसल को होता है। हालांकि इससे बचने के लिए किसान सिंचाई का उपयोग कर सकते हैं।

^ रबी की फसल के लिए सबसे सेंसटिव महीना फरवरी-मार्च माना जाता है। इन दिनों मौसम एकाएक बदलता है। कई बार तो अधिक सर्दी तो कई बार ओलावृष्टि की आशंका बनी रहती है। प्राकृतिक आपदा का कोई बचाव नहीं है मगर एकाएक तापमान बढ़ने पर दवा के छिड़काव से नुकसान से बचा जा सकता है।’’

जगदीशपूनिया, उपनिदेशक कृषि विभाग