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अपरंच में उकेरी विविधवर्णी साहित्यिक छवि
जोधपुरसे प्रकाशित होने वाली राजस्थानी भाषा और साहित्य की त्रैमासिक पत्रिका अपरंच के बीकानेर अंक का लोकार्पण ढोला मारू होटल में अतिथियों ने किया। मुक्ति संस्थान द्वारा आयोजित समारोह में नगर के साहित्यकारों-नाटककारों, अतिथियों और वक्ताओं ने अपरंच के इस विशेष अंक में उकेरी गई बीकानेर की विविधवर्णी साहित्यिक छवि को मायड़ भाषा में सृजन यात्रा आगे बढ़ाने की प्रेरणा देने वाली बताया। नए कलेवर से साक्षात कराने वाली अपरंच के प्रधान संपादक पारस अरोड़ा एवं बीकानेर अंक के संपादक डा नीरज दइया की सेवाओं को सराहा गया।
मुक्ति के सचिव राजेंद्र जोशी , हरीश बी शर्मा , नवनीत पाण्डे ने, जगदीश सोनी, मनोज व्यास, श्रवण कुमार आदि ने अपने विचार प्रकट किए। अध्यक्षता वरिष्ठ रंगकर्मी मधु आचार्य आशावादी ने की। जोधपुर से आए अपरंच के संपादक गौतम अरोड़ा ने आगंतुकों का स्वागत तथा हिंगलाजदान रतनू ने आभार ज्ञापित किया।
होटल ढोला मारू में पुस्तक का विमोचन करते शहर के सृजनधर्मी
बेहतर है राजस्थानी साहित्यिक पत्रकारिता की स्थिति
अपरंचका लोकार्पण करने के बाद वरिष्ठ राजस्थानी कथाकार भंवर लाल भ्रमर ने कहा कि राजस्थानी साहित्यिक पत्रकारिता आज पहले से बहुत बेहतर स्थिति में नजर आती है। पहले दो तीन पत्रिकाएं निकलती थी। आज अनेक पत्रिकाएं निकल रही है।
रचनात्मकता रहेगी चर्चित
विशिष्टअतिथि व्यंग्यकार बुलाकी शर्मा ने कहा कि डॉ दइया द्वारा संपादित बीकानेर अंक अपनी रचनात्मकता के कारण चर्चित रहेगा।
गागरमें सागर
बीकानेरअंक के संपादक डॉ नीरज दइया ने कहा कि उन्होंने इस अंक में गागर में सागर समाहित करने का प्रयास किया है। उनका कहना था कि यह अंक केवल बीकानेर के साहित्यिक परिदृश्य की बानगी मात्र है।