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- नौ लोग हुआ करते थे बीकानेर नगर के अति विशिष्ट नागरिक
नौ लोग हुआ करते थे बीकानेर नगर के अति विशिष्ट नागरिक
भगवान श्री जगन्नाथ जी के मंदिर के विषय में रायबहादुर सोढ़ी हुक्म सिंह ने यह लिखा है कि उक्त मंदिर डिस्पेंसरी-भवन के सन्निकट स्थित है। इस मंदिर का निर्माण महाराजा सरदार सिंह जी की धर्मप|ी महारानी भटियाणी जी के द्वारा वि.सं. 1933 अर्थात ई. सन 1876 में एक बड़ी लागत में कराया था। वे लिखते है कि इन मंदिरों के अतिरिक्त बीकानेर नगर मेंं कतिपय जैन मंदिर तथा जैन साधुओं के उपासरे भी हे। इनमें से भांडासर तथा नेमनाथ मंदिर अपनी विशालता, भव्यता तथा प्राचीनता की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। ओसवाल सेठ भांडा तथा उसके भाई द्वारा निर्मित यह मंदिर उतने ही पुराने है, जितना कि बीकानेर नगर। सोढ़ी हुक्म सिंह ने चिंतामणि तथा श्री महावीर मंदिरों का उल्लेख भी अपनी कृति में किया है तथा इनके विषय में यह लिखा है कि उक्त दोनों मंदिरों का निर्माण ओसवालों के चौदह मोहल्लों के द्वारा कराया गया था। इनमें से प्रथम मंदिर का निर्माण बच्छावत कर्मचंद के सुझाव पर कराया गया था। जिसके परिवार का विध्वंस महाराजा सूरसिंह के हाथों हुआ था। सोढ़ी हुक्म सिंह ने तत्कालीन बीकानेर के प्रमुख गणमान्य नागरिकों का उल्लेख भी अपनी कृति में किया है और उनके नामों को निम्नांकित क्रम में अपनी कृति में अंकित किया है।: (1) महाराज सवाई सिंह (2) राय बहादुर कस्तूर चंद, जिन्हें लाभ चंद डागा के नाम से भी जाना जाता था। (3) सुगन चंद दम्माणी (4) बाल किशन दास दम्माणी (5) राम किसन दास बागड़ी (6) गोविंद दास चेतन दास दम्माणी (7) मोहता शिव दास और जगन नाथ (8) पूनम चंद सावणसुखा ओसवाल (9) चांदमल ढ़ढ्ढा। इस प्रकार सोढ़ी हुक्म सिंह उस समय के बीकानेर नगर के गणमान्य और अतिविशिष्ट नागरिकों का परिचय देते है जिन्हें राज्य में विशिष्ट मान-सम्मान और प्रतिष्ठा प्राप्त थी। (लगातार)