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आधे से भी कम वेतन ले रहे हैं 20 हजार शिक्षक
राज्यमें दो साल पहले नियुक्त हुए तृतीय श्रेणी के 20 हजार अध्यापक को आधे से भी कम वेतन मिल रहा है। इनका प्रोबेशन काल सितंबर में पूरा हो चुका है।
राज्य में वर्ष 2012 में जिला परिषदों के माध्यम से 20 हजार तृतीय श्रेणी अध्यापकों की नियुक्तियां हुई थीं। इन्हें आज भी प्रोबेशन काल वाला 11100 रुपए स्थिर मानदेय मिल रहा है। नियमानुसार प्रोबेशन के बाद मूल वेतन 12900 रुपए होता है। इसमें 107 प्रतिशत महंगाई भत्ता और पांच प्रतिशत मकान किराया भत्ता मिलाकर कुल 27348 रुपए वेतन मिलना चाहिए। लेकिन इन अध्यापकों का स्थायीकरण नहीं किया जा रहा है। शिक्षक परेशान हैं। शिक्षा निदेशालय और जिला परिषद के चक्कर लगा रहे हैं। प्राथमिक एवं माध्यमिक शिक्षक संघ के महामंत्री महेंद्र पांडे का कहना है कि कोर्ट ने वेतन नहीं देने के आदेश नहीं दिए हैं। वेतन काम करने पर मिलता है। कोर्ट से अनुमति लेकर शिक्षकों का वेतन निर्धारण किया जा सकता है।
आरटेट के अंकों का है मामला
राज्यमें तृतीय श्रेणी अध्यापक लगने के लिए आरटेट पास होना अनिवार्य है। केंद्र के नियमानुसार 60 प्रतिशत अंकों वाला टेट पास होता है। सरकार केवल पांच प्रतिशत छूट दे सकती है। लेकिन पिछली सरकार ने एससी, एसटी, आेबीसी, एसबीसी, महिला, विधवा, परित्यक्ता आदि कैटेगरी को 55 प्रतिशत से कम अंक लाने पर भी आरटेट पास कर दिया था। कम अंकों से आरटेट पास लिखित परीक्षा पास कर अध्यापक चयनित हो गए। इन अध्यापकों के आरटेट और नियुक्ति का प्रकरण न्यायालय में विचाराधीन है। आरटेट में 55 प्रतिशत से अधिक अंक लाने वाले सभी का वेतन स्थायीकरण नहीं किया जा रहा है।
^तृतीय श्रेणी अध्यापकों का मामला कोर्ट में लंबित है। वेतन स्थायीकरण को लेकर प्रारंभिक शिक्षा निदेशालय के वित्त सलाहकार से मार्ग दर्शन मांगा है।\\\'\\\'
सुभाषशर्मा, जिलाशिक्षाधिकारी, प्रारंभिक