बीकानेर/लूणकरणसर. वन विभाग की रेसक्यू टीम सोमवार को पैंथर के बेहोशी का इंजेक्शन लगाने में तो कामयाब हो गई, लेकिन कई घंटे की मशक्कत के बाद भी वह उसे पकड़ नहीं पाई।
दोपहर पौने तीन बजे से वन विभाग की रेसक्यू टीम को आरडी 303 के पास पैंथर दिखाई दिया। टीम ने उसे बेहोश करने के लिए राइफल से इंजेक्शन शूट किया। निशाना सटीक बैठा। कुछ देर बाद वह लड़खड़ाने लगा और पास में पुलिया के पास पहुंचा।
यहां वन विभाग की टीम पीछे हो गई लेकिन इसी बीच भीड़ जुटने लगी। मोटर साइकिल और जीपों से लोग पैंथर को देखने के लिए उसके पीछे भागने लगे। पैंथर नहर के पटड़ों पर पहुंचा तो फिर दूसरा शूट किया लेकिन निशाना चूक गया।
रेस्क्यू टीम पीछे-पीछे रही। करीब चार बजे फिर तीसरा शूट किया और वह भी निशाने पर लगा। कुछ देर बाद पैंथर को चलने में भी मुश्किल होने लगी लेकिन भीड़ के शोर के कारण वह काफी उत्तेजित था। इसलिए बेहोशी की दवा भी काम नहीं कर सकी।
धीरे-धीरे वह नहर को पार कर जंगलों में घुस गया। वहां नहर के पटड़ों के किनारे गुफाएं हैं। इलाका भी सेमग्रस्त है। वह उसी ओर बढ़ गया। सात बजे दल थक कर वापस लौट आया।
भीड़ होती तो गिरफ्त में होता पैंथर
सोमवार को सुबह आठ बजे से ही पैंथर का पीछा कर रही थी। दोपहर में जब दो शूट निशाने पर लगे तो वह बेहोशी की हालत में था लेकिन सैकड़ों लोगों का शोर सुन वह फिर भागने लगता। वन अधिकारी जनता से पीछे हटने के लिए हाथ जोड़ते रहे लेकिन भीड़ नहीं मानी। इसी कारण चार घंटे तक वह भागता रहा।
अंधेरा बना बाधा :
दो शूट होने के बाद शाम के सात बज गए। इस कारण वह अंधेरे में छिप गया। यदि यही शूट दिन में सुबह लगे होते तो लगातार कुछ घंटे और पीछा किया जा सकता था। चूंकि दिन में भीड़ ने उसे छेड़ा इस कारण उसका स्वभाव भी चिड़चिड़ा होने से रात में उसके करीब जाना भी खतरा है।