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‘नैतिकता के बीज बोने से होगी पर्यावरण शुद्धि’

7 वर्ष पहले
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मनुष्यजीवन के लिए पर्यावरण का शुद्ध होना आवश्यक है। वायु प्रदूषण, धूल और धुआं के मिश्रण से जीवन साधक रहकर खराब हो जाती है। वायु में गैसों के मिश्रण में आक्सीजन की उचित मात्रा श्वसन तंत्र के लिए आवश्यक है। ध्वनि प्रदूषण से सुनने की क्षमता कम हो जाती है। पानी भोजन के प्रदूषण से उसकी पोषण क्षमता निर्मल नहीं रहती।

यह विचार अणुव्रत समिति की ओर से अणुव्रत उद्बोधन सप्ताह के तहत सोमवार को विक्टोरियस सीनियर सैकंडरी स्कूल में ‘पर्यावरण शुद्धि दिवस’ पर आयोजित कार्यक्रम में समिति के अध्यक्ष डॉ. गोपाल आचार्य ने व्यक्त किए। भंवरलाल चौहान ने पर्यावरण शुद्धि के उपाय बताए। संगठन मंत्री अजय आचार्य ने बताया कि अणुव्रत आचार संहिता का 11वां नियम पेड़ों को नहीं काटने, पौधारोपण करने वन संरक्षण करने की ओर ध्यान आकर्षित किया। सुंदरलाल झाबक ने अणुव्रत गीत प्रस्तुत किया।

इस मौके पर किशन गोपाल भाटी, शाला प्रधान मनोज व्यास ने भी विचार रख। आचार्य ने बताया कि सूरदासाणी बगेची मुरलीधर व्यास कॉलोनी के राधा पार्क में पौधरोपण किया गया। 30 सितंबर को जैन सीनियर सैकंडरी स्कूल में नशा मुक्ति दिवस का आयोजन होगा।

कार्यक्रम को संबोधित करते डॉ. गोपाल आचार्य।