क्लीन सिटी बनाने के लिए नगर निगम अगर एक माह तक पर्याप्त संसाधनों के साथ अभियान चलाए तभी शहर की सूरत बदल सकती है कि छह दिन चलने वाले विशेष सफाई अभियान में। छह दिन में तो कुछ वार्डों की ही सफाई होगी वह भी मुख्य-मुख्य स्थानों की। ऐसा इसलिए होगा क्योंकि तो नगर निगम के पास पर्याप्त संसाधन है और ही सफाई कर्मचारी।
जनसंख्या के हिसाब से शहर को साफ करने के लिए निगम को 3500 सफाई कर्मचारियों की जरूरत है लेकिन है 1150। इनमें भी करीब सौ कर्मचारी ऐसे हैं जिन्हें दूसरे कामों में लगा रखा है। इस स्थिति में 1050 कर्मचारियों के कंधों पर 60 वार्डों की सफाई का जिम्मा है।
नगर निगम प्रशासन स्वयं मान रहा है कि उनके पास 10 डंपर, सात ट्रैक्टर और पांच जेसीबी है लेकिन इससे अधिक की जरूरत तो एक वार्ड में होती है।
ऐसे में पूरे शहर की सफाई संभव नहीं है। निगम प्रशासन ठेके पर कचरा उठवा रहा है उसके पेटे हर दिन निगम करीब डेढ़ लाख रुपए खर्च कर रहा है लेकिन इसके बाद भी शहर का एक भी ऐसा कोना नहीं है जिसे साफ-सुथरा कहा जा सके।
मशीनरी
वर्तमान में : डंपर10, जेसीबी 5, ट्रैक्टर 7
जरूरत है : डंपर40, जेसीबी 40 और ट्रैक्टर 50
कचरा पात्र
वर्तमान में : 30वार्डों में 100
जरूरत है : 30वार्डों में 200
सफाई कर्मचारी
वर्तमान में : 1150
जरूरत है : 3500
हर दिन का खर्च
33 ट्रैक्टर से कचरा उठाने का : 1,28,000, अपने वाहनों में पेट्रोल डलवाने अन्य काम पर 22 लाख रुपए प्रतिदिन
नगर निगम सफाई व्यवस्था के संसाधन, सहयोग चाहिए, हम करेंगे शहर को साफ
नगरनिगम के महापौर नारायण चौपड़ा मानते हैं कि हमारे पास जो संसाधन है उनसे ही शहर को साफ-सुथरा बनाने का प्रयास कर रहे हैं। प्रयास यह करेंगे कि जिस क्षेत्र में गंदगी अधिक है वहां पर समय-समय पर विशेष अभियान चलाया जाए। नगर निगम राज्य सरकार से और संसाधन उपलब्ध कराने का आग्रह करेगा।
इसके अलावा शहर के लोगों से यह अपील की जाएगी कि वे शहर को साफ-सुथरा बनाने में सहयोग करे। जरूरी हुआ तो सफाई के काम को पीपीपी मॉडल में भी दिया जाएगा।
इतने कम संसाधनों से सफाई संभव नहीं
शहर कांग्रेस अध्यक्ष यशपाल गहलोत का मानना है कि बीकानेर नगर निगम के पास पर्याप्त संसाधन नहीं है।