बीकानेर। फड़ बाजार और कोटगेट के हालात पर हाईकोर्ट की तल्खी के बाद हरकत में आया प्रशासन कोटगेट रेलवे क्रॉसिंग पर लगने वाले जाम की समस्या पर अभी भी चुप्पी साधे बैठा है। रेलवे ने इस क्रॉसिंग पर आरयूबी और सांखला रेलवे क्रॉसिंग पर एलीवेटेड रोड को फिजिबल माना है लेकिन प्रशासन जाम में फंसने वाले लोगों को राहत देने का प्रयास करता नजर नहीं रहा।
प्रशासन ने अभी तक आरयूबी या एलीवेटेड रोड दोनों में से किसी पर भी फैसला नहीं लिया है। जबकि रेलवे बाइपास को सिरे से नकार चुकी है। आरयूबी के लिए 20 करोड़ रुपए मंजूर होने के बाद सारी औपचारिकताएं पूरी कर ली गई। जिला कलेक्टर ने इसकी एनओसी की फाइल लटका रखी है। जून में बीकानेर आई सरकार ने भी कोटगेट रेलवे क्रॉसिंग के मुद्दे पर एक्सपर्ट से सलाह-मशविरा किया पर कोई निर्णय नहीं लिया। यहां से गुजरने वाले करीब चार लाख लोगों के हर दिन करीब 20 बार जाम में फंसने की समस्या का कोई हल निकलता नजर नहीं रहा।
जाम में फंसने वाले लोगों का कहना है कि आरयूबी बने या एलीवेटेड रोड। अब इस पर फैसला होना चाहिए। विदित रहे कि 2003 वसुंधरा सरकार ने सांखला रेलवे फाटक पर एलीवेटेड रोड मंजूर की थी लेकिन इसके बाद इस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। वहीं 2012 में कांग्रेस की सरकार ने कोटगेट रेलवे क्रॉसिंग पर रेल अंडर ब्रिज मंजूर किया। इसकी वित्तीय स्वीकृति भी जारी हो चुकी पर बजट नहीं मिला। नगर विकास न्यास ने अब इसमें आगे की कार्रवाई के लिए राज्य सरकार से मार्गदर्शन मांगा है।
^कोटगेट पर यातायात व्यवस्था को सुचारू करने के लिए कुछ समय पहले वन-वे व्यवस्था लागू की गई, मगर इससे समस्या हल होने के बजाए और अधिक बढ़ गई है। जिन्ना रोड पर प्रवेश बंद होने से टैक्सियों का जमावड़ा विश्वज्योति सिनेमा के सामने लगा रहता है। इससे यातायात पूरे दिन बाधित रहता है। रही बात रेलवे लाइन की तो रेलवे अंडर ब्रिज बनाने में सबसे बड़ी समस्या बारिश के पानी की है।
प्रेमरतन जोशी, व्यापारी,जोशीवाड़ा रोड : '' यातायात व्यवस्था को सुचारू और सुव्यवस्थित करने के लिए सबसे पहले अतिक्रमण को हटाना होगा। वहीं जिन्ना रोड का रास्ता खोलने से भी कोटगेट पर जाम की समस्या से निजात मिलेगी। रेलवे लाइन तो समस्या है ही। फाटक बंद होने पर लोगों को इंतजार करना पड़ता है। इसका हल एलिवेटेड रोड ही है। प्रशासन को व्यापारी वर्ग के साथ इस मुद्दे पर कोटगेट निवासियों से भी विचार-विमर्श करना चाहिए।- उमाशंकर आचार्य, निवासी,जोशीवाड़ा ।
''रेलवे लाइन हटनी चाहिए। जरुरी काम से कोटगेट होकर यदि कही जाना हो और रेलवे फाटक बंद हो तो बहुत समस्या होती है। कई बार तो 20 मिनट तक फाटक नहीं खुलता। ऐसे में लगे जाम को सामान्य होने में लगभग एक घंटा गुजर जाता है। यह हालात एक-दो दिन के नहीं है। बल्कि कोटगेट पर ऐसी स्थिति अमुमन रहती है। राहगीरों की समस्या को देखते हुए प्रशासन को इस समस्या का स्थायी हल निकालना चाहिए।''- संतोष आचार्य, राहगीर,सुराणों का मोहल्ला निवासी
''कोटगेट पर ट्रेफिक व्यवस्था माकूल नहीं है। जगह-जगह हो रहे अतिक्रमण भी समस्या है। रेलवे अंडर ब्रिज से समस्या का निदान होना संभव नहीं लगता। क्योंकि बारिश के दिनों में शहर का सारा गंदा पानी कोटगेट से होकर गुजरता है। यदि हम 50 साल आगे की सोचे तो रेलवे लाइन की समस्या का स्थायी हल बाईपास ही है।''
रेलवे अपना हिस्सा देने को तैयार
एलीवेटेडरोड या आरयूबी बनाने की स्थिति में रेलवे तैयार है। आरयूबी बनाने की स्थिति में रेलवे का कहना है कि अगर जिला कलेक्टर एनओसी जारी कर देती है तो हम अपनी कार्रवाई तत्काल ही शुरू कर देंगे। उत्तर-पश्चिमी रेलवे के सीनियर डीईएन (कोआर्डिनेशन) एन.के. शर्मा का कहना है कि रेलवे दोनों की विकल्पों के लिए तैयार है। हमारा प्रयास है कि शहर की जनता को जाम की समस्या से निजात मिले।
कलेक्ट्रेट में अटका आरयूबी
कोटगेटरेलवे क्रॉसिंग पर प्रस्तावित अंडर ब्रिज कलेक्ट्रेट में अटक कर रह गया है। जिला कलेक्टर जब तक इस आरयूबी के लिए एनओसी जारी नहीं करेगी काम शुरू नहीं हो पाएगा। ऐसे में जनता को दिनभर जाम की परेशानी से दो-चार होना पड़ेगा। कांग्रेस सरकार ने इस अंडरब्रिज के लिए 20 करोड़ रुपए भी मंजूर किए। रेलवे ने भी इस पर अपनी सहमति जता दी। सारा काम होने के बाद जिला कलेक्टर ने लोगों की आपत्तियों के चलते इसकी एनओसी जारी नहीं की। केईएम रोड के दुकानदारों ने कोटगेट के वैभव का हवाला देते हुए इसका विरोध शुरू कर दिया था।
एलीवेटेडरोड भी देगी लोगों को राहत
सांखलारेलवे फाटक पर एलीवेटेड रोड बनती है तो भी लोगों को राहत मिलेगी। रेलवे ने 2006 में सांखला फाटक को फिजिबल मानते हुए रेल बाइपास को नकार दिया था। एलीवेटेड रोड पर सहमति देने के बाद रेलवे ने आरयूआईडीपी को बाइपास की एवज में लिए गए एक करोड़ रुपए में से 90 लाख रुपए लौटा दिए।