पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • तीन दिन मदद को तलाशती रही आंखें

तीन दिन मदद को तलाशती रही आंखें

7 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
बीकानेर। छह सितंबर की रात तीन बजे बचो-बचो की आवाज के साथ आंख खुली। होटल के कमरे का दरवाजा खोल कर देखा तो दूसरी मंजिल की सीढिय़ां पर चढ़ता पानी नजर आया। होटल मालिक जान मोहम्मद केवल इतना ही बोल पाए कि ऊपरी मंजिल पर पहुंचो, बाढ़ गई है। आनन-फानन में बच्चों को गोद में लेकर ऊपर की और दौड़े। होटल की चौथी मंजिल पर पहुंच तो गए लेकिन साथ में खाने-पीने नहीं ले पाए। दो दिन तक होटल की चौथी मंजिल पर जो खाने-पीने की व्यवस्था थी उससे काम चलाया लेकिन बाद में वह भी खत्म हो गई।
एक दिन बाद ही बच्चे बुजुर्ग भूख प्यास से तड़पने लगे। हम क्षेत्र की सबसे ऊंची होटल में थे। उसके चारों और करीब 25 फीट तक पानी भरा हुआ था। एेसा मंजर तीन दिन तक हमारे दिमाग में घूमता रहा। 10 को सेना के हेलीकॉप्टर देखा तो टेरिस पर चढ़ी महिलाओं ने लाल दुपट्टा लहराकर मदद मांगी।

ये कहना है श्रीनगर में आई बाढ़ में फंसे बीकानेर के मोहम्मद जाहिर का। शनिवार सुबह जाहिर सहित 10 लोग बीकानेर पहुंचे। बीकानेर पहुंचने के बाद ऊपर वाले का शुक्र अदा करते हुए जाहिर बताते हैं कि वे 30 अगस्त को अपने ससुर युनूस सहित 10 जनों के साथ श्रीनगर घूमने निकले थे। ये लोग श्रीनगर के अलावा गुलमर्ग, किश्तवाड़ा पहलगांव में घूमने जाने वाले थे लेकिन बाढ़ में पांच दिन तक फंसे रहने के कारण वे कहीं भी नहीं जा सके।
श्रीनगर में बाढ़ के कारण मोबाइल टावरों ने काम करना बंद कर दिया ऐसे में बीकानेर में बैठे परिजनों से भी संपर्क नहीं हो पाया। जाहिद बताते हैं कि सेना ने पीने के पानी की बोतलें, बैड, नमकीन के पैकेट बिस्किट हमारी ओर फेंके। तीन दिन भूखे हम लोगों को नाश्ता मिला तो थोड़ी राहत मिली। पानी थोड़ा उतरा तो हम लोगों जैसे-तैसे सेना की मदद से बाहर निकले।
ये लोग फंसे थे बाढ़ में

मोहम्मदयुनूस, नसीम बेगम, तनवीर मुगल, जेबा, मसूद बेग, सगफूता, मोहम्मद जाहिर खां, उजमा, शाहिद अर्श। ये लोग बीकानेर के मुक्ताप्रसाद नगर के रहने वाले हैं।

बीकानेर पहुंचने पर छलक पड़े खुशी के आंसू
पांचदिन तक बाढ़ में घिरे रहने के बाद बचने की उम्मीद छोड़ चुके मोहम्मद युनूस और उसके परिवार के लोग जब शनिवार को बीकानेर पहुंचे तो उनके और रिश्तेदार की आंखें खुशी के मारे छलक पड़ी। युनूस बताते हैं की उनकी पत्नी शुगर पैसेंट हैं। खाना-पानी नहीं मिलने के कारण कुछ देर के लिए तो उनकी हालत भी बिगड़ गई लेकिन खुदा का शुक्र है कि हम सभी सही-सलामत पहुंच गए। बीकानेर रेलवे स्टेशन पहुंचने पर सलीम बेग सहित परिवार के दर्जनों लोगों ने उनका स्वागत किया।
(बीकानेर रेलवे स्टेशन पर श्रीनगर से लौटे लोगों को देखकर खुशी जताते परिजन अन्य।)