बीकानेर। पीबीएम पीडिएट्रिक हॉस्पिटल में भर्ती विकृत एवं अनाथ बच्चे ‘अजूबा’ को अब ऑपरेशन के लिए दिल्ली या जयपुर ले जाया जाएगा। सात अगस्त को हॉस्पिटल परिसर में ही इस बच्चे को कोई छोड़ गया था। तब से यहां के डाक्टर और स्टाफ ही उसकी देखभाल कर रहे हैं। उसके हाथ है पांव। हाेठ कटे हैं, तालू भी नहीं। कान छोटे और अपनी जगह से थोड़े नीचे हैं।
रीढ़ की हड्डी पर फोड़ा है और नाभि के नीचे का हिस्सा खुला हुआ है जिसमें से वे अंग बाहर चुके हैं जो शरीर के अंदर होने चाहिए। ऐसे में अब उसे जिंदा रखने और जीवन बेहतर बनाने के लिए कुछ ऑपरेशन करने की जरूरत हैं। इनमें होंठ और तालू की प्लास्टिक सर्जरी। पेट से बाहर निकले हिस्सों को अंदर शिफ्ट करना। यूरोलॉजी का ऑपरेशन आदि शामिल है।
ऑपरेशन की जरूरतों को देखते हुए पीबीएम हॉस्पिटल सुपरिटेंडेंट डा.के.के.वर्मा ने एक बोर्ड बनाया था। इस बोर्ड में पीडिएट्रिक विभागाध्यक्ष डा.पी.के.बैरवाल, सर्जन डा.गिरिश प्रभाकर, कार्डियोलॉजिस्ट डा.पिंटू नाहटा, यूरो सर्जन डा.मुकेश आर्य, एनस्थीसिया के डा.एच.आर.रहमान शामिल है।
डा.बैरवाल के मुताबिक, इस बोर्ड ने बच्चे की केस स्टडी के साथ उसे मौके पर भी जाकर देखा। उसकी स्थिति देखते हुए माना कि यहां ऑपरेशन करना संभव नहीं है। वजह, छोटी उम्र, अत्यधिक आॅपरेशन और शरीर के प्रमुख अंग नहीं होना।
कार्डियो थोरोसिक सर्जन, प्लास्टिक सर्जन की सुविधा यहां उपलब्ध नहीं है। इसके अलावा भी बच्चे का ऑपरेशन करने के लिए काफी सुपर स्पेशियलिटी सेवाएं और सुविधाएं चाहिए। इन्हें देखते हुए हायर इंस्टीट्यूट में भेजने का निर्णय लिया है।
दिल धड़क रहा है, श्वांस चल रही है : वह जिंदा इंसान है। यह सिर्फ इसलिए कहा जा सकता है क्योंकि उसका दिल धड़क रहा है। श्वांस चल रही है। ट्यूब के जरिये दूध पहुंचाया जा रहा है। बच्चे की देखभाल करने वाली यूनिट के प्रभारी डा.आर.के.
सोनी कहते हैं, डाक्टरी मदद बेहतर होने का अनुमान इसीसे लगाया जा सकता है, दुनिया में इस तरह के बच्चों के जिंदा रहने की इतनी लंबी अवधि शायद कहीं नहीं रही हो। हमारी कोशिश है उसे हर तरह की मेडिकल सुविधा उपलब्ध करवा उसका जीवन बेहतर बनाएं।