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म्यूजियम में रखेंगे 1857 की क्रांति के लिथोग्राफ

7 वर्ष पहले
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बीकानेर. मुगल शासक जलालुद्दीन मोहम्मद अकबर, जहांगीर, औरंगजेब, शाहआलम, मुईनुद्दीन जहांबशाह फुरुर्खशिखर की स्वर्ण मुद्राएं और 1857 की क्रांति से संबंधित लिथोग्राफ सार्वजनिक किए जाएंगे। इन्हें बीकानेर के म्यूजियम में सजाने की तैयारी की जा रही है।

म्यूजियम में करीब 32 साल से ताले में बंद पड़ी 16वीं और 18वीं शताब्दी की पुरा कलाकृतियां, प्राचीन स्वर्ण मुद्राएं और 1857 की क्रांति से संबंधित 77 लिथोग्राफ अब बाहर आएंगे।
इसके साथ ही बीकानेर के शासक रहे महाराजा गज सिंह, सूरत सिंह, रतन सिंह, सरदार सिंह, डूंगर सिंह तथा महाराजा गंगा सिंह के समय की रजत तांबे की मुद्राओं को भी अब देश-दुनिया के पर्यटकों को करीब से देखने का मौका मिलेगा। उनके प्राचीन हथियार, महत्वपूर्ण पाषाण और धातु प्रतिभाओं को भी प्रदर्शित किया जाएगा। म्युजियम परिसर में इस साल 38 लाख रुपए की लागत से बनी नई बिल्डिंग के बाद दीर्घाओं का विस्तार किया गया है।
वर्तमान में म्युजियम की आठ कला दीर्घाएं हैं, जिनमें केवल विभिन्न काल खंडों से संबंधित पुरा सामग्री रखी हुई है। नई दीर्धा बनने से स्टोर में बंद पुरा सामग्री को बाहर निकालने की प्रक्रिया विभाग ने शुरू कर दी है। स्थान की कमी के कारण यह पुरा सामग्री पिछले करीब 32 सालों से ताले में बंद पड़ी थीं।

महाराजाओं के लघुचित्रों का प्रदर्शन होगा

बीकानेर म्युजियम की विस्तारित दीर्घाओं में बीकानेर महाराजाओं के लघुचित्रों को भी पर्यटकों के लिए रखा जाएगा। जानकारी के मुताबिक बीकानेर म्युजियम में बीकानेर के 20 शासकों के लघुचित्र उपलब्ध हैं। स्थान के अभाव में अब तक इन लघुचित्रों का प्रदर्शन नहीं हो पाया है। लघुचित्र में बीकानेर के प्रथम शासक राव बीकाजी, छठे शासक राय सिंह, डूंगर सिंह, रतन सिंह, अनूप सिंह से संबंधित है।

23 हजार सिक्के, प्रदर्शित मात्र 93

बीकानेर म्युजियम में कुषाण, गुप्त , चौहान, गुलाम, खिलजी, तुगलक, लोदी, मुगल, ब्रिटिश एवं देशी राजाओं के समय के लगभग 23,405 सिक्के उपलब्ध है। म्युजियम की ऐतिहासिक चित्र एवं मुद्रा कक्ष में इनमें से मात्र 93 सिक्कों को ही प्रदर्शित किया गया है। 23,312 सिक्के स्टोर में बंद है।
म्युजियम परिसर में नई बिल्डिंग का निर्माण कार्य पूरा हो गया है। वृत अधीक्षक कार्यालय से संबंधित अधिकांश काम इसी बिल्डिंग में शिफ्ट कर दिए गए है। पुरानी बिल्डिंग में जो स्थान मिला है उसमें दीर्घाओं का विस्तार कर स्टोर रूम में पड़ी पुरा कलाकृतियों को प्रदर्शित किया जाएगा।'' केदारनाथ व्यास