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‘वनों का संरक्षण जरूरी’

7 वर्ष पहले
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बीकानेर | जनसंख्यामें निरंतर वृद्धि हो रही है किंतु पर्यावरण के प्रति हमारी उदासीनता के कारण पूरा वातावरण प्रदूषित हो रहा है। वनस्पति एवं जीवों की कई जातियां-प्रजातियां विलुप्त हो रही है।

यह कहना था संभागीय मुख्य वन संरक्षक ए.एस. गुरु का। वे वन विभाग की ओर से विश्व ओजोन परत संरक्षण दिवस पर मंगलवार को पब्लिक पार्क स्थित उप वन संरक्षण कार्यालय परिसर में विचार संगोष्ठी की अध्यक्षता कर रहे थे। उन्होंने कहा कि प्रदूषण मुक्त वातावरण बनाने के लिए अधिकाधिक पौधरोपण करना चाहिए। उप वन संरक्षक एम.के अग्रवाल ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण के लिए सरकार की ओर से अनेकानेक योजनाएं संचालित की जाती रही है। इसके साथ ही प्रदूषण मुक्त वातावरण बनाने में आमजन की सहभागिता जरूरी है। उप वनसंरक्षक स्टेट द्वितीय के.जी. श्रीवास्तव ने कहा कि पेड़-पौधों को संरक्षित करके ही हम वर्तमान असंतुलित पर्यावरण को संतुलित बना सकते है। उपवन संरक्षक आयोजना कौशल सक्सेना ने कहा कि वनों का संरक्षण करके ही मानव जाति का विकास किया जा सकता है। इस मौके पर वन संरक्षक आई.ए. मुगल, कार्य आयोजना अधिकारी सुपांग शशि, सुरेंद्र सिंह राठौड़ ने भी विचार रखे।

‘ओजोन परत को सुरक्षित रखने का प्रयास जरूरी’

बीकानेर| राष्ट्रीयगाय आंदोलन ने विश्व ओजोन दिवस पर संगोष्ठी आयोजित की गई। कार्यक्रम की शुरुआत राष्ट्रीय गाय आंदोलन के जिला समन्वयक महिपाल सिंह पुंदलसर ने राष्ट्र कवि मैथिलीशरण गुप्त की कविता ‘दांतों तले तृण दाब कर, हे दीन गायन कह रही’ से कही। कार्यक्रम के वक्ता सूरजमाल सिंह नीमराना ने कहा कि ओजोन परत को सही करने का एकमात्र विकल्प देशी गोवंश का गोबर, गोमूत्र देशी घी है। मुख्य अतिथि गो-विज्ञान परीक्षा समन्वयक प्रवीण सिंह परमार ने कहा कि हम सबको गो-माता का विज्ञान समझना होगा। कार्यक्रम की अध्यक्षता चौ. महेंद्र सिंह ने की। इस अवसर पर अश्विनी बरेनिया, अनूप गहलोत, मनोहर सिंह जोधा, हरिसिंह आदि ने विचार रखे। संचालन किशोर सिंह राजीव ने किया।

विश्व ओजोन परत संरक्षण दिवस पर संगोष्ठी को संबोधित करते वक्ता।