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नर्सेज की नियुक्ति पर परेशानी में फंसा मेडिकल प्रशासन
किसीनए कानूनी पेंच में फंसने से पहले ही नर्सेज की नियुक्ति प्रक्रिया खत्म कर लेने की मेडिकल कॉलेज प्रशासन की जल्दबाजी अब उसी के गले कील फांस बन गई है। वजह है, वरीयता के लिए जोड़े जाने वाले नंबर की गाइड लाइन जिसका इस नियुक्ति में पूरी तरह से पालन नहीं हो पाया। ऐसे में 122 लोगों के ज्वाइन कर लेने के बाद नए सिरे से गुरुवार को दुबारा लिस्ट जारी होगी। इन सबके बीच नर्सेज ने प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए हंगामा कर दिया।
बुधवार को मेडिकल कॉलेज के गेट पर ताला जड़ प्राचार्य को बाहर निकलने से रोक दिया। प्रशासन अब जहां एक ओर नई सूची तैयार कर रहा है वहीं दूसरी ओर नर्सेज को यह समझाने की कोशिश कर रहा है कि प्रक्रिया दुबारा पूरी करने के बावजूद पात्र लोगों का अहित नहीं होगा।
बुधवार को जब नर्सेज को पता चला कि लिस्ट नए सिरे से जारी होगी तो उन्होंने मेडिकल कॉलेज के गेट पर प्रदर्शन शुरू कर दिया। नर्सेज नेता संतोष तंवर, महेश मेघवाल, आरिफ, संजयसिंह आदि की अगुवाई में प्रदर्शनकारियों ने नारेबाजी की। शाम को जब प्रिंसिपल रवाना हुए तो गेट बंद कर दिया।
प्रिंसिपल डा.आर.ए. बंब, सुपरिटेंडेंट डा.के.के. वर्मा आदि ने बातचीत कर समझाने की कोशिश भी की लेकिन ये कर्मचारी इस बात पर अड़े रहे कि जिन्हें नियुक्ति दे दी है उन्हें वापस नहीं हटाया जा सकता। जो लिस्ट जारी हो चुकी है उसे लागू किया जाए। कर्मचारी नेताओं ने चेतावनी दी है कि शुक्रवार को यदि किसी भी नवनियुक्त कार्मिक को पद से हटाया गया तो विरोध प्रदर्शन करेंगे।
मेडिकल कॉलेज के आगे प्रदर्शन करते नर्सेज कर्मी।
मामला यह है
526नर्सिंगकर्मियों की नियुक्ति पर कोर्ट का निर्देश मिला तो पूर्व में लिए गए आवेदन के अनुरूप ही जीएनएम कोर्स के अंकों के आधार पर मेरिट लिस्ट बना जारी कर दी गई। इसमें से 122 लोगों ने ज्वाइन भी कर लिया। बाद में गाइड लाइन की बारीकियां देखी तो पता चला कि जीएनएम के साथ ही सीनियर सैकंडरी के मार्क्स मिलाकर वरीयता बनानी थी। इसी आधार पर पहली लिस्ट खारिज कर दूसरी बनाने की प्रक्रिया शुरू हुई।
सरकार ने मांगी रिपोर्ट
पूरेमामले की रिपोर्ट मांगते हुए सरकार ने दोषी लोगों के खिलाफ कार्रवाई को भी कहा है। इस पूरे मामले में आठ लोगों की कमेटी बनी हुई थी। प्रिंसिपल डा.आर.ए.बंब का कहना है, दुर्भावना के साथ किसी का अहित नहीं हुआ है। तकनीकी कम