बुलाकी शर्मा को टैस्सीटोरी अवार्ड
शार्दूलराजस्थानी रिसर्च इंस्टीट्यूट बीकानेर के तत्वावधान में इटली मूल के राजस्थानी विद्वान डॉ. एल.पी. टैस्सीटोरी की 126वीं वर्षगांठ पर शुक्रवार को म्यूजियम परिसर स्थित डॉ. टैस्सीटोरी प्रतिमा स्थल पर पुष्पांजलि अर्पित की और उनके व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर प्रकाश डाला। इस मौके पर साहित्यकार बुलाकी शर्मा को टैस्सीटोरी अवार्ड से सम्मानित किया गया। मुख्य अतिथि बार एसोसिएशन के अध्यक्ष बाल किशन शर्मा ने कहा कि साहित्यकार बुलाकी शर्मा गत चार दशक से लगातार हिंदी-राजस्थानी में सृजनरत हैं। उन्होंने कहा कि शर्मा की ‘हिलोरों’ मरदजात अर दूजी कहाणियां कहानी संग्रह तथा ‘सांच नै नीं आंच’ ‘हुकारियां हुकमोजी’ बाल उपन्यास अत्यंत पठनीय होने के कारण चर्चित रही। विशिष्ट अतिथि भवानीशंकर व्यास (विनोद) ने कहा कि बुलाकी शर्मा गद्य की प्राय: सभी विधाओं में सार्थक एवं स्तरीय लेखन करते रहे हैं ओर चार दशक से निरंतर सृजनशील हैं। उन्हें गद्य पुरुष कहा जाए तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी। मुख्य वक्ता राजेंद्र जोशी ने कहा कि शर्मा वर्षों से स्तंभ लेखन भी करते रहे हैं। कभी स्वयं के नाम से कभी छद्म नाम से किंतु वे सदैव स्वयं पर चोट करते हैं। कथाकार श्रीलाल जोशी ने कहा कि शर्मा दुशाले में लपेट कर वार करने में सिद्धहस्त हैं। कार्यक्रम के अध्यक्ष मनोहर चावला ने कहा कि शर्मा समर्पित साहित्य साधक हैं। कार्यक्रम में साहित्यकार सरदार अली परिहार ने भी विचार रखे। शुरू में डॉ. मुरारी शर्मा ने आगंतुकों का स्वागत अंत में संजय पुरोहित ने आभार जताया।
व्यंग्यकार बुलाकी शर्मा का सम्मान करते आयोजन से जुड़े लोग।
टैस्सीटोरी की जयंती आज
प्रज्ञालयसंस्थान और राजस्थानी युवा लेखक संघ की ओर से 13 दिसंबर की सुबह दस बजे पब्लिक पार्क के बाहर स्थित स्व. एल.पी. टैस्सीटोरी की समाधि स्थल पर पुष्पांजलि दी जाएगी। कवि-कथाकार कमल रंगा ने बताया कि इस असर पर तीन भाषाओं (हिंदी, राजस्थानी उर्दू) के तीन पीढ़ी के रचनाकारों का रचना पाठ कार्यक्रम रखा गया है।