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एमएफआर आबंटन घोटाले में उच्च स्तरीय जांच की मांग उठी

7 वर्ष पहले
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महाजनफील्ड फायरिंग रेंज के विस्थापित किसानों की बजाय अधिकारियों-भूमाफियाओं की ओर से मिलीभगत कर जमीन हड़पने और इसे आगे बेच देने का आरोप लगाते हुए विधायक भंवरसिंह भाटी ने इस मामले की उच्च स्तरीय जांच करवाने की मांग विधानसभा में उठाई। भाटी ने कहा, 1984 में जिन 34 गांवों की जमीन फील्ड फायरिंग रेंज के लिए अवाप्त की उसके बदले में मुआवजा दिया और बदले में भूमि आवंटन का प्रावधान भी किया। तब से लगातार इन किसानों को जमीन आवंटित की गई। इस बीच वर्ष 2007 से 2010 के बीच कुछ लोगों ने फर्जी आवंटन आदेश तैयार कर एनएच पर हजारों बीघा जमीन आवंटित करवा ली। किसानों को पता ही नहीं कि उनके नाम से जमीन आवंटित हुई है। एसडीएम, तहसीलदार अन्य अधिकारियों ने वे जमीनें राजस्व रिकॉर्ड में अंकित भी कर दी। बाद में ये अलग-अलग लोगों को बेच दी गई।

भाटी ने बताया कि कलेक्टर बीकानेर ने इस प्रकार के 13 मामलों में 15 दिन पहले मुकदमा दर्ज करवाया है। पटवारी, गिरदावर नायब तहसीलदार आदि को सस्पेंड किया है। मामले की जांच उसी अधिकारी से करवाई गई है जो उस अवधि में कोलायत के एसडीएम थे। वास्तविकता यह है कि ऐसे 13 नहीं सैकड़ों मामले हैं। ऐसे में सरकार इस मामले में उच्च स्तरीय जांच दल गठित कर जांच करवाए। न्यायिक दल बनाकर दोषी लोगों के खिलाफ कार्रवाई करें।