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एकीकरण की बार-बार जांच पड़ रही है भारी

7 वर्ष पहले
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स्कूलोंके एकीकरण की बार-बार जांच करना शिक्षा विभाग को अब भारी पड़ने लगा है। कलेक्टर को मिली आपत्तियों के आधार पर एकीकरण के प्रस्तावों की चौथी बार जांच हो रही है। जबकि सरकार को प्रस्ताव पहले ही भेजे जा चुके हैं।

एकीकरण में जिले की 469 स्कूलों को मर्ज किया गया था। इनमें से 171 स्कूलों को गलत तरीका से मर्ज करने का आरोप लगाते हुए क्षेत्र के लोगों और जनप्रतिनिधियों ने परिवेदनाएं जिला कलेक्टर को सौंपी थी। कलेक्टर के निर्देश पर एडीएम सिटी की अध्यक्षता में गठित डीईओ और बीईईओ की जांच कमेटी हालांकि अपनी रिपोर्ट सौंप चुकी है लेकिन कलेक्टर ने तीन बिंदुओं पर दुबारा जांच करने के निर्देश दे दिए। अब जिला शिक्षाधिकारी प्रारंभिक ने सभी बीईईओ को दुबारा स्कूलों का भौतिक सत्यापन करने को कहा है। बीईईओ के लिए मुश्किलें बढ़ गई हैं। प्रत्येक ब्लॉक में 15 से 20 स्कूलों को लेकर शिकायतें हैं। एक दिन में सभी का भौतिक सत्यापन संभव नहीं है। बीईईओ का कहना है कि दो जांच पहले हो चुकी। अब दो जांच कलेक्टर के निर्देश पर हो रही है। इसकी वजह से अन्य सभी काम ठप पड़े हैं। उधर, शिक्षक संगठनों का कहना है कि जांच के नाम पर केवल टाइम पास किया जा रहा है निष्कर्ष नहीं निकाला जा रहा। जांच कितनी बार हो जाए लेकिन परिणाम वही रहने हैं।

51स्कूलों की जांच रिपोर्ट : जिलाशिक्षाधिकारी प्रारंभिक ने शहरी क्षेत्र की 51 स्कूलों की जांच रिपोर्ट तैयार की है। इनमें पुलिस लाइन, सुभाषपुरा, पवनपुरी साउथ और उप्रावि रामपुराबास में स्कूल भवन छोटा बताया गया है। इनमें दो किमी दायरे वाली आठ प्रावि उप्रावि को मर्ज किया गया है। इसी प्रकार 18 स्कूल एक ही परिसर में संचालित हो रहे हैं। उन्हें मर्ज नहीं किया जाएगा। शेष मर्ज 28 स्कूलों की दूरी एक से दो किलोमीटर के दायरे में है। जिले में 70-80 स्कूल ऐसी मिली हैं, जो मर्ज करने योग्य नहीं हैं। इनमें कुछ स्कूलों को जनप्रतिनिधियों के दबाव के चलते भी शामिल करने की बात सामने आई है।

इन बिंदुओं पर दुबारा जांच

>स्कूलों में वर्तमान नामांकन।

> आदर्श स्कूलों में भवन की स्थिति।

> एकीकरण में मर्ज हुई स्कूलों की दूरी।

^जिला कलेक्टर ने तीन बिंदुओं पर दुबारा रिपोर्ट मांगी है।बीईईओ को जांच करने को कहा गया है।\\\'\\\'

सुभाषशर्मा, डीईओ,प्रारंभिक