बीकानेर. शहर जैसे सर्दी का इंतजार कर रहा था। वह भी संडे की दिन आई। फिर क्या था, ज्योंही कोहरे के साथ आसमान से उतरी ठंड घरों में घुसी, चूल्हे पर खदबदाते खीचड़े से उसकी अगवानी हुई। घाट के चटखारे लगे। बाजरे के सोगरे को मूळी की सब्जी में चूर सबड़का लेते हुए सर्दी को अपनी हद में रहने की चेतावनी दे दी गई।
घरों के साथ ही बाजार भी सर्द संडे के स्वागत में सज गया। गली-मोहल्ले, चौक-चौराहों पर लगने वाली नमकीन की स्थायी दुकानों पर तो पकौड़ों के पावे बार-बार पकने लगे बीसियों जगह अस्थायी दुकानें लग गई। थड़ी पर रखे चूल्हे में हाथ की थपकी देकर तले जा रहे गरमागरम दाळिये चखने के लिए लोगों को इंतजार करते भी देखा गया। दूसरी ओर गजक, तिलपट्टी, रेवड़ी की दुकानों पर भी बढ़ गई खरीदारी।
खासतौर पर जोशीवाड़ा, बड़ा बाजार, कोटगेट में सजे इन उत्पादों के अस्थायी मार्केट में इस सीजन की सबसे अच्छी बिक्री रविवार को दर्ज हुई। शहर में एक ओर जहां खाने-खिलाने का दौर चलता रहा वहीं आकाश में सूरज और बादलों के बीच कशमकश होती रही। सूर्य की किरणें धरती चूमने में सफल तो हुई लेकिन उनका तेज सर्द हवाओं ने छीन लिया। इसके बावजूद धूपस्नान करते लोग दिखे।
दिनभर जिस सर्दी को चिढ़ाते रहे शाम होते-होते उसका प्रभाव बढ़ गया। इसके बावजूद आधी रात तक चौक में हथाई करने के अभ्यस्त लोगों को डरकर रजाई में दुबकना मंजूर नहीं था। बस फिर क्या था, लकड़ियां जमा हुई। चौक-चौक में चेतन हो गए धूणे। धूणों के इर्द-गिर्द हाेने लगी हथाई और दूर बेबस खड़ी रही ठंड। ठंड पर अपनी जीत की खुशी में चटर-चटर मूंगफलियां तोड़ता बीकानेर मानो बजा रहा था तालियां।