मलमास कल से, वर्जित होंगे मांगलिक कार्य
मलमासमंगलवार से शुरू होंगे। इसके साथ ही सूर्य बृहस्पति राशि में आने के कारण सभी मांगलिक कार्य भी वर्जित हो जाएंगे। धनु मलमास 16 दिसंबर को सुबह 8.41 बजे से शुरू होकर 14 जनवरी को शाम सात बजकर 26 मिनट तक रहेगा।
इस अवधि में किसी भी प्रकार के शुभ मांगलिक कार्य नहीं हो सकेंगे। ज्योतिर्विद पंडित हरिनारायण व्यास ‘मन्नासा’ के अनुसार 30 मुहूर्ति संक्रांति का पुण्यकाल दोपहर तीन बजकर छह मिनट से पांच बजकर छह मिनट तक रहेगा। मन्नासा के अनुसार सूर्य सदैव मार्गी तथा उदित रहने वाले ग्रह है। जब भी सूर्य धनु और मीन राशि में प्रवेश करता है तो मलमास होता है। धनु और मीन बृहस्पति की राशियां है। बृहस्पति देवगुरु है। सूर्य बृहस्पति के शिष्य है। जब भी सूर्य बृहस्पति की राशि में आते है तो सभी प्रकार के मांगलिक कार्य निषेध हो जाते हैं।
मन्नासा के अनुसार मलमास में कई खाद्य वस्तुएं महंगी होगी तो लोगों में विभिन्न प्रकार का भय भी रहेगा। मलमास वृष, कर्क, सिंह, तुला, मकर, कुंभ राशि वालों के लिए लाभकारी होगा। मलमास में सूर्य की प्रतिकूलता से बचने के कई उपाय भी बताए गए हैं। मन्नासा के अनुसार माणिक्य धारण करने, आदित्य हृदय स्रोत का पाठ करने लाल चंदन का मुठिया रविवार को सूर्य मंदिर में दक्षिणा सहित चढ़ाने से काफी लाभ होता है।
मलमास में नहीं करने चाहिए ये कार्य
मलमासमें बावड़ी, तलाब, कुआ, बगीचा, देव प्रतिष्ठान, व्रतों का उद्यापन, नवविवाहित वधू प्रवेश, पृथ्वी, सोना आदि का दान, सोमयज्ञ, अष्टका श्राद्ध, गोदान , नवीन अन्न से किए जाने वाले यज्ञ, वेदाध्ययन, नील वृक्ष का विवाह, बालकों के संस्कार, दीक्षा, यज्ञोपवीत, विवाह, मुंडन, तीर्थ, राजदर्शन, अभिषेक, यात्रा, कर्णवेध, परीक्षा आदि कार्य मलमास में नहीं करने चाहिए।
आर्थिकस्थिति सुधारता है संक्रान्ति व्रत
मन्नासाके अनुसार संक्रान्ति व्रत आर्थिक स्थिति सुधारने वाला होता है। धुन संक्रान्ति में मनुष्य छिद्र रहित कलश में जल, फल, सर्वोषधि और दक्षिणा आदि रखकर अष्ट दल पर स्थापित करके मध्य में स्वर्णिम आभा वाले सूर्य की गंधादि से पूजा करके एक मुक्त व्रत करें। इससे आर्थिक स्थिति सुधरती है।
इसलिए होते हैं मांगलिक कार्य वर्जित
मन्नासाबताते हैं कि ज्योतिष शास्त्र एवं धर्म शास्त्र में प्राय: अधिकमास क्षयमास को ही मलमास कहा गया है। व्यवहार में सूर्य की र