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तीन माह बाद भी नहीं खुला रानीबाजार रेलवे क्रॉसिंग

6 वर्ष पहले
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रेलवे ने कोटगेट पर बाइपास को नकारा

रानीबाजाररेलवे फाटक को खोलने या बंद करने का फैसला हाईकोर्ट ने जिला प्रशासन पर छोड़ा था, लेकिन तीन महीनों बाद भी प्रशासन इस संबंध में कोई निर्णय नहीं ले पाया है।

रानीबाजार रेलवे क्रॉसिंग की मेंटिनेंस के नाम पर रेलवे ने जिला प्रशासन के सामने करीब एक करोड़ रुपए बकाया बताते हुए जुलाई महीने में इसे बंद कर दिया था। इसके बाद से यह क्रॉसिंग बंद पड़ा है। इस स्थिति में वाहन चालकों को आंबेडकर सर्किल से चौपड़ा कटला जाने के लिए करीब डेढ़ किलोमीटर घूम कर जाना पड़ता है। राजस्थान उच्च न्यायालय ने अक्टूबर में ही इस पर अपना फैसला सुनाते हुए जिला कलेक्टर को दोनों विभागों के अधिकारियों को साथ लेकर मामले का निस्तारण करने के लिए निर्देश दे दिया लेकिन इसके बाद आज तक इस संबंध में एक भी बैठक नहीं हुई।

नवंबर और दिसंबर में जहां नगर निगम चुनावों के कारण बैठक नहीं हो सकी तो जनवरी और फरवरी में पंचायत चुनावों के कारण अधिकारी इसके लिए समय नहीं निकाल सके। मंगलवार (10 फरवरी) को मीटिंग बुलाई गई तो जिला कलेक्टर प्रभारी मंत्री राजकुमार रिणवां की बैठक में व्यस्त रही, वहीं डीआरएम मंजू गुप्ता 20 फरवरी को जीएम दौरे की तैयारियों में जुटी रही। ऐसे में मीटिंग स्थगित कर दी गई।

आरयूबी को फिजीबल माना रेलवे ने

रानीबाजाररेलवे क्रॉसिंग पर रेलवे आरयूबी को फिजीबल माना है। रेलवे ने कहा, यहां पर चार मीटर ऊंचा आरयूबी बना सकता है, जो छोटे वाहनों के लिए सुविधाजनक होगा। रेलवे ने इस क्रॉसिंग मेंटिनेंस के बदले रेलवे एक करोड़ रुपए की मांग करते हुए रेलवे ने एक जुलाई को इस क्रॉसिंग को आवागमन के लीए बंद कर दिया।

तीन बार स्थगित हो गई मीटिंग

जिलाकलेक्टर, डीआरएम और सानिवि के एडीशनल चीफ के बीच होने वाली संयुक्त बैठक तीन बार स्थ्रगित हो चुकी है। मंगलवार को भी जिला कलेक्टर ने दोनों अधिकारियों को बुलावा भेजा लेकिन बाद में इसे स्थगित कर दिया गया।

जुलाई से बंद है रानीबाजार रेलवे क्रॉसिंग

रानीबाजाररेलवे क्रॉसिंग बंद होने के बाद मोहनलाल चांडक वगैरह ने राजस्थान उच्च न्यायालय की डबल बैंच में रेलवे अधिकारियों और जिला कलेक्टर के जनहित याचिका दायर की थी। उच्च न्यायालय ने 13 अक्टूबर 14 को दिए अपने आदेश में इस क्रॉसिंग को जनहित में बंद नहीं करने का निर्णय दिया था लेकिन इसके बाद भी रेलवे अधिकारियों ने इसे नहीं खोला। न्यायालय ने अपने आदेश में यह भी कहा था कि दोनों पक्षों की सामूहिक मीटिंग में इस समस्या के निस्तारण पर बात करे। इसके बाद भी इतना समय बीत गया लेकिन आज तक इस समस्या का हल नहीं हो पा रहा है। न्यायालय ने अपने आदेश में यह भी कहा कि जिला कलेक्टर, सानिवि के अतिरिक्त मुख्य अभियंता और रेलवे के सीनियर डिवीजनल इंजीनियर आपस में बैठकर खर्चे को कैसे पूरा किया जा सकता है फैसला करें।