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“चार कोट’ में झलका आम आदमी का दर्द

6 वर्ष पहले
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टाउलहॉल में मंचित नाटक चार कोट में सरकारी व्यवस्था के प्रति आम आदमी के दर्द को हास्य के रूप में प्रस्तुत किया गया है।

स्व. ए.वी.कमल द्वारा लिखे इस नाटक का मंचन बुधवार को अनुराग कला केन्द्र की ओर से टाउन हॉल में किया गया। जनता की सेवा एवं सुरक्षा के प्रतीक चार कोट से वर्तमान में आम आदमी सहमा हुआ है तथा उनसे बचने का प्रयास कर रहा है। तंत्र की व्यवस्था में जकड़ा हुआ आमजन राजनीति में किस तरह यूज एंड थ्रो की तरह है तथा किसी तरह से उसकी भावना को एक सीढ़ी के रूप में इस्तेमाल किया गया है, सहित ऐसी कई घटनाओं को इस नाटक में दर्शाया गया। नाटक के मूल में आमआदमी सरकार, कानून एवं राजनीति में व्याप्त जटिल खामियों एवं विद्रूपता के प्रति एक दर्द है जिसे व्यंग्यात्मक एवं चुटीली भाषा के रूप में प्रस्तुत किया गया है फिर भी दर्शकों को हंसाना नाटक का उद्देश्य है। अनुराग कला केन्द्र के महामंत्री कमल अनुरागी ने बताया कि इसी नाटक का मंचन 19 फरवरी को मुंबई में होने वाले 15वे अंतरराष्ट्रीय काला घोड़ा कला महोत्सव में किया जाएगा। नाटक के निर्देशक सुधेश व्यास थे। संगीत संयोजन राजेन्द्र झुंझ ने किया।

यह थे कलाकार

अशोकव्यास, नवलकिशोर व्यास, उत्तम सिंह, के.के.रंगा, राजशेखर शर्मा, विकास शर्मा, मदन मारू, सुमित मोहिल, जितेन्द्र पुरोहित, शिव सुथार, हरमनप्रीत, श्रीवल्लभ पुरोहित, प्रतीक आचार्य, रवि व्यास, अलका व्यास, आशीष चुरा।

टाउल हाॅल में मंचित नाटक ‘चार कोट’ का भावपूर्ण दृश्य।

आर.के.लक्ष्मण के कॉमन मैन को समर्पित रही प्रस्तुति

नाटकचार कोट की प्रस्तुति स्व. आर.के.लक्ष्मण के कॉमन मैन को समर्पित रही। अनुराग कला केन्द्र के महामंत्री कमल अनुरागी ने बताया कि पदम विभूषण से सम्मानित कार्टूनिस्ट आर.के.लक्ष्मण ने आम आदमी के दर्द को अपने कार्टून के मुख्य चरित्र कॉमन मैन के जरिए हमेशा उठाया और सरकारी व्यवस्था के पिसते आम आदमी के नजरिये को बेबाकी से लोगों के सामने रखा।