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देवी कुंड सागर के ऐेतिहासिक बाग में स्थित है स्काउटिंग ट्रेनिंग सेंटर

6 वर्ष पहले
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इन मृत्यु स्मारक लेखों से यह विदित होता है कि महाराजा गज सिंह के समय तक के नरेशों के साथ औसतन 12 स्त्रियां, प्रत्येक दिवंगत नरेश के साथ सती हुई हैं जबकि महाराजा जोरावर सिंह के साथ सती, होने वाली स्त्रियों की संख्या सबसे बड़ी अर्थात 22 की है। सोढ़ी हुक्म सिंह ने यह लिखा है कि सती हुई इन स्त्रियों में से अंतिम सती हुई महिला, महाराजा सूरत सिंह के द्वितीय पुत्र मोती सिंह की प|ी उदयपुर प्रिंसेज दीप कंवर थी। मोती सिंह का देहांत, वि.सं. 1882 अर्थात ई. सन 1825 में हुआ था, जिनकी स्मृति में प्रति वर्ष आसोज बदि चतुर्थी को देवी कुंड सागर में एक मेला भरता है जिसमें एक बड़ी संख्या में लोग-बाग सम्मिलित होते है। यह देवी कुंड सागर, राजपरिवार के अंत्येष्टि स्थल कल्याण सागर के पास ही स्थित है। इस सरोवर के किनारे एक बाग तथा कुछ निर्माण है जिन्हें राजपरिवार के लोगों और स्त्रियों के द्वारा विविध धार्मिक और अन्य समारोहों के अवसर पर यहां पधारने पर प्रयोग में लाया जाता था। बीकानेर नगर से देवी कुंड एवं कल्याण सागर के लिए एक पक्की सड़क का निर्माण भी करा दिया गया था। सोढ़ी हुक्म सिंह के द्वारा अपनी कृति में देवी कुंड सागर के सन्निकट (किनारे पर स्थित) जिस बाग तथा निर्माण कार्यों का उल्लेख किया गया है, यह वही स्थल है जहां पर वर्तमान में राजस्थान स्टेट भारत स्काउट्स एंड गाइड्स का संभागीय प्रशिक्षण केन्द्र है ओर समय-समय पर यहां भारत स्काउट्स एंड गाइड्स के स्थानीय स्तर से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक के शिविर आदि समायोजित होते रहते है। बीकानेर में राजशाही के अंत तथा बीकानेर राज्य के भारतीय संघ में विलय के उपरांत यह बाग बगीचा उजड़ कर वीरान हो गया था। जब से इसे भारत स्काउट्स एंड गाइड्स के द्वारा अपने नियंत्रण में लिया गया तब से इसके जीर्णोद्धार का जबर्दस्त कार्य शुरू हुआ। सेवाभावी स्काउट्स तथा गाइड्स ने अपने श्रमदान और जन सहयोग में इस स्थल का कायाकल्प कर दिया है और आज यह प्रदेश का एक द्रण्टव्य स्काउटिंग कैम्पिय सेंटर है। (लगातार)