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‘महीनो फागण को, म्हैं श्याम...’

7 वर्ष पहले
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महीनोफागण को, म्हैं श्याम संग खेला होळी...। देवर म्हारो रे हरिये रुमाल वाळो रे...सरीखे गीत फाल्गुनी बयार बयार में घुलने के साथ ही अब नगर के हर आम खास के साथ ही सभी आयु वर्ग के लोगों को होली आने का अहसास करा रहे हैं। चंग पर थाप, धमाल के साथ झूमते होली के रसिक और महिलाओं के वेश में नृत्य करते स्वांग।

होलाष्टक लगने के साथ ही नगर में ये नजारे अब आम होने लगे हैं। शाम ढलते ही होली की ये रंगत नगर के विभिन्न क्षेत्रों में देखी जा सकती है। जस्सूसर गेट, जूनागढ़, पुरानी गिन्नाणी, हनुमान हत्था, गोपेश्वर बस्ती, शहर के अंदरूनी मोहल्ले आदि ऐसे क्षेत्र हैं जहां चंग लिए रसिकों की टोलियां मिल जाएगी। ये टोलियां चंग की थाप पर केवल धमाल गा रही हैं बल्कि धमाल के माध्यम से राजनीति के वर्तमान हालातों पर कटाक्ष भी किए जा रहे हैं। रसिकों की धमाल सुनने के लिए राह चलते लोग भी आनंद लेने के लिए रूक जाते हैं। जूनागढ़ के आगे रसिकों की टोलियां परंपरागत धमाल के स्वर गहरो तपयो रे राज गंगासिंह रो....ऐड़े-छेड़े तोपा देखो अंग्रेजों री लागी रे...बीच में घोड़ो गंगासिंह रो रे..., गिन्नाणी क्षेत्र में चंग रा धमीड़ा म्हैं तो रोटिया पोवती सुण्या रे...चूल्हा चौकी,छोड़ भागी बाखळ बारे में...चंग धीरो रे बजावणियां अमर हुयजा रे....सरीखी धमालों पर तान छेड़ी जा रही है। शहर के अंदरुनी हिस्सों में चंग लिए मस्तानों की टोलियाें के गीत, बासुंरी की तान और नृत्य करते स्वांग एक स्थान से दूसरे स्थान पर घूम रहे हैं। होळी आई रे फागणिया थारे द्वारे... होळी आई रे जैसे बोल जब चंग की थाप के साथ निकलते ही होळी की मस्ती का अहसास करा रहे हैं। होलाष्टक लगने के बाद हुए थंब पूजन और रम्मतों के दौर के साथ होली की रंगत से बीकानेर सराबोर होने लग गया।

धरणीधर मैदान में फागणिया फुटबॉल कल

फागणियाफुटबॉल मैच एक मार्च धरणीधर खेल मैदान में आयोजित होगा। आयोजन समिति के सीताराम कच्छावा ने बताया कि दोपहर दो बजे आयोजित होने वाले इस मैच में विचित्र वेशभूषा पहनकर स्वांग बने खिलाड़ी फुटबॉल खेलेंगे। मैच को लेकर संरक्षक रामकिसन आचार्य के नेतृत्व में बैठक हुई। बैठक में मैदान बल्लियां लगाने सहित विभिन्न कार्यों की जिम्मेवारी सौंपी गई।

फाइबर चंग की बिक्री बढ़ी

हरआयु वर्ग के लिए फाइबर से बने चंग पहली पसंद बन गए है। छोटे बच्चों से लेकर 16 वर्ष तक की उम्र के बच्चों के लिए ये चंग 60 रुपए से लेकर 350 रुपए तक में मिल रहे हैं। फाइबर चंग को बच्चे ही नहीं बड़े भी पसंद कर रहे हैं। इसका मुख्य कारण चमड़े से बने चंग की तुलना में फाइबर चंग का सस्ता होना है। फाइबर का 30 इंच का चंग जहां 450 रुपए में मिल जाता है वहीं चमड़े से बने इस चंग कीमत 750 रुपए तक हैं। चंग बेचने वालों का कहना है कि चमड़े की तुलना फाइबर से बने चंग अधिक बिक रहे हैं। इन चंग पर वैल वेट अबरी के उपयोग के साथ इसे सजाया भी जा रहा है। चंग खरीदने आए लोगों का मानना है कि चमड़े से बने चंग को तपाने की आवश्यकता रहती है जबकि फाइबर चंग के पेच कसते ही इसकी आवाज अच्छी हो जाती है।

ओझा सत्संग भवन में प्रतिभाओं को सम्मािनत करते अतिथि।

पुरानी गिन्नानी में चंग पर धमाल और फाग गीत गाते खंजर क्लब के सदस्य।

बृज होली महोत्सव आज

श्रीजी ग्रुप ऑफ आर्ट की ओर से 28 फरवरी को श्रीरामसर की जनता विहार कॉलोनी में बृज होली महोत्सव का आयोजन किया जाएगा। श्रवण गहलोत ने बताया कि इस कार्यक्रम में ठाकुरजी के साथ केशर की होली, लट्‌ठमार होली तथा एक क्विंटल गुलाब के फूलों से होली खेली जाएगी।

होलीमिलन समारोह मनाया

बिजलीघर मजदूर यूनियन शहर, इंटक की ओर से ओझा सत्संग भवन में होली मिलन समारोह का आयोजन किया गया। मुख्य अतिथि जनार्दन कल्ला थे। विशिष्ट अतिथि जुगलकिशोर ओझा, कर्मचारी नेता सूरज रतन ओझा सूरज भाटी थे। अध्यक्षता रमेश व्यास ने की इस मौके पर शिवनारायण पुरोहित का सम्मान किया गया। संचालन भंवर ओझा ने किया।