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तेंदुए से छीना शिकार

7 वर्ष पहले
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(लूणकरणसर। तेंदुए के आतंक के खिलाफ ग्रामीणों ने किया वन विभाग के अधिकारियों को घेराव। वन विभाग के अधिकारियों से बातचीत करते ग्रामीण।)
बीकानेर/लूणकरणसर। चार महीने पहले लूणकरणसर के जंगलों में पहुंचा तेंदुआ अब ग्रामीणों के लिए खतरा बनता जा रहा है। भोजन की तलाश में वह गांव और ढाणियों पर हमला करने लगा है। बीती रात तेंदुए ने हड़मान मेघवाल की ढाणी में एक बछड़ी का शिकार किया और उसे घसीटते हुए करीब एक किलोमीटर दूर ले गया। इससे नाराज ग्रामीणों ने वन विभाग के खिलाफ प्रदर्शन किया। बुधवार की रात यह चक 303 आरडी के पास हुई तेंदुए ने हड़मान मेघवाल की ढाणी पर हमला कर दिया और वहां बैठी गाय की बछड़ी को मार गिराया।
बाद में उसे मुंह में दबोच कर दूर ले गया। इस दौरान बछड़ी के जोर-जोर से चिल्लाने की आवाज सुनकर ढाणी में सो रहे लोग जाग गए। तेंदुए के आने का शोर हो गया और आस-पास की ढाणी से भी लोग लाठियां अन्य हथियार लेकर उसके पीछे दौड़ पड़े। काफी मशक्कत के बाद उन्होंने बछड़ी को उसके चंगुल से मुक्त करवा लिया। तेंदुआ अंधेरे के कारण जंगल में भाग गया। ग्रामीण वापस ढाणी लौट आए।

घटना रात करीब दो बजे की बताई जा रही है। तेंदुए के डर से हड़मान की ढाणी और आस-पास रहने वाले ग्रामीण पूरी रात सो नहीं सके। उन्हें आशंका थी कि अपना शिकार लेने तेंदुआ वापस सकता है। इसलिए उन्होंने रातभर पहरा दिया और सुबह वन विभाग के कार्यालय पहुंच कर धरना दे दिया।

तेंदुएकी शिकार बनी मृत बछड़ी को लेकर ग्रामीण गुरुवार सुबह वनविभाग ऑफिस जा पहुंचे। कार्यालय में कोई कर्मचारी नहीं होने पर ग्रामीणों ने कालू रोड को जाम कर दिया। बाद में वहीं धरने पर बैठ गए। लंबी जद्दोजहद के बाद उपखण्ड अधिकारी मुरारीलाल वर्मा मौके पर पहुंचे और ग्रामीणों से वार्ता की। ग्रामीणों ने बताया कि आए दिन तेंदुआ पशुओं का शिकार कर रहा है। ग्रामीणों की आजीविका का साधन पशु हैं यदि इनका भी शिकार होगा तो उनका परिवार कैसे पलेगा। बाद में एसडीएम ने प्रदर्शनकारियों को समझाकर सड़क मार्ग खुलवाया तथा जिला कलेक्टर वन विभाग के उच्चाधिकारियों को स्थिति से अवगत करवाया। इसी बीच डीएफओ वन्यजीव रामनिवास कुमावत, रेंजर महेन्द्र सिंह चौधरी पहुंचे तो ग्रामीणों ने उनका भी घेराव किया। प्रदर्शनकारियों में टाइगर फोर्स, एनएसएस, महिपाल सिंह, सुखनाथ भादू आदि शामिल थे। बाद में मृत बछड़े का पोस्टमार्टम भी कराया गया।

इंसानों पर भी कर सकता है हमला: भूखा तेंदुआ इंसानों पर भी हमला कर सकता है। वन्यजीव विशेषज्ञों के मुताबिक सप्ताह में एक बार शिकार करने के बाद उसे दूसरे शिकार की जरूरत होती है। इस बीच उसे शिकार नहीं मिला तो वह आदमखोर भी हो सकता है। खासकर छोटे बच्चों को निशाना बना सकता है। भूख से वह बस्ती में भी सकता है।
वन विभाग के अधिकारी भी इस स्थिति को भांपने लगे हैं। इसी कारण गुरुवार को दोपहर बाद फिर एक टीम जोधपुर से बीकानेर के लिए रवाना की गई है। यह टीम तेंदुए को बेहोश करने में माहिर है। कई दिनों तक टीम यहां रहेगी और इंजेक्ट कर तेंदुए को बेहोश कर पकड़ने का प्रयास करेगी।
(वन विभाग के अफसरों को घेरा, तेंदुआ नहीं पकड़ने पर रोष )