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सात साल में चार गुनी बढ़ गई यूरोलोजी सेंटर की लागत

5 वर्ष पहले
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पीबीएमहॉस्पिटल परिसर में निर्माणाधीन यूरोलोजी सेंटर की लागत सात साल में चार गुना बढ़ चुकी है। इसे देखते हुए मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने अब तीन माह में सेंटर के आधे भाग को शुरू करने की तैयारी की है।

सुपर स्पेसिलिटी सेवाओं के तहत हॉस्पिटल में यूरोलोजी एवं नेफ्रोलोजी सेंटर 2009 में पीपीपी मोड में बनना शुरू हुआ था। उस वक्त उसकी लागत मात्र तीन करोड़ रुपए थी।

यह राशि खत्म होने के कारण निर्माण भी बीच में ही रुक गया। वर्ष 2013 में इसकी लागत नौ करोड़ और 2015 में 12 करोड़ रुपए आंकी गई थी। इतना पैसा खर्च होने के बाद भी सेंटर शुरू नहीं हो पा रहा था। मेडिकल कॉलेज प्राचार्य डॉ. आर.पी.अग्रवाल ने इस संबंध में एक बैठक बुलाकर सेंटर के आधे भाग को तीन माह में शुरू करने का फैसला किया है। बैठक में अधीक्षक डॉ. जी.एल.मीणा, यूरोलोजी हैड डॉ. मुकेश आर्य, यूआईटी, पीडब्ल्यूडी के अभियंता सहित दानदाता की ओर से कौशल दुग्गड़ शामिल थे।

^यूरोलोजी सेंटर काफी सालों से लंबित चल रहा है। दानदाता और संबंधित विभागों के साथ बैठक कर इसके आधे भाग को तीन माह में शुरू करने का बीड़ा उठाया गया है। प्रोजेक्ट की लागत हर साल बढ़ने से काफी मुश्किलें रही हैं। डॉ.आर.पी.अग्रवाल, प्रिंसिपल, मेडिकल कॉलेज

आउटडोर दो ओटी शुरू होंगे

यूरोलोजीसेंटर में आगामी तीन महीने में आउटडोर और दो ऑपरेशन थिएटर शुरू कर दिए जाएंगे। मोड्यूलर थिएटर के लिए मेडिकल कॉलेज को राजस्थान माइन्स एंड मिनरल्स ने एक करोड़ रुपए दान स्वरूप दी है। इसके बनने के बाद पीबीएम की मुख्य बिल्डिंग से यह विभाग नए भवन में शिफ्ट हो जाएगा।

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