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जिला परिषद में शुरू हुई संभागस्तरीय कार्यशाला
समाजमें बाल विवाह को रोकने के लिए कई कानून है, जिनकी उपयोगिता तभी सिद्ध हो सकेगी जब उन्हें सही ढंग से लागू किया जाए। यह बात राजस्थान उच्च न्यायालय के न्यायाधिपति आर.एस.राठौड़ ने कही।
अवसर था जिला परिषद सभागार में आयोजित दो दिवसीय संभाग स्तरीय कार्यशाला का। ‘बाल विवाह एवं बाल तस्करी प्रतिषेध तथा बालकों के अधिकार-भविष्य का संचय’ विषयक कार्यशाला में न्यायाधिपति राठौड़ ने कहा कि बाल विवाह जैसी कुरीति को समाज से पूर्ण रूप से समाप्त करने के लिए सभी वर्गों को मिलजुलकर कार्य करना होगा। न्यायाधिपति अरुण भंसाली ने बाल विवाह की रोकथाम के लिए प्रशासन और समाज से एकजुट होकर कार्य करने की बात कही। जिला एवं सेशन न्यायाधीश हरी कुमार गोदारा ने बाल अधिकारों की जानकारी दी।
उन्होंने कहा कि बालकों को शारीरिक, मानसिक एवं बौद्धिक दृष्टि से सुसंस्कारित होने की आवश्यकता है। कार्यशाला के दौरान उरमूल ट्रस्ट की ओर से नुक्कड़ नाटक की प्रस्तुति दी गई। जिसमें बाल विवाह के दुष्परिणाम के बारे में बताया गया। कार्यशाला में बाल कल्याण समिति की अध्यक्ष डॉ.प्रभा भार्गव, राउमावि शिवबाड़ी के प्रधानाचार्य सूर्यनारायण सिंह आदि ने भी विचार रखे। संचालन विशिष्ट अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट रामपाल जाट ने किया।
जिला परिषद में बेटी बचाओं की सीख देता कलाकार।